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अमेरिकी बाजार में भारतीय फार्मा को राहत, चुनिंदा दवाओं और सामग्री पर जीरो टैरिफ

पेटेंट वाली दवाओं पर 100% टैरिफ की तैयारी के बीच अमेरिका ने कुछ विशेष फार्मा उत्पादों को दी शुल्क छूट

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ चुनिंदा फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को जीरो टैरिफ श्रेणी में शामिल किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित फार्मा उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, इस छूट का लाभ भारत से अमेरिका जाने वाली सभी दवाओं को नहीं मिलेगा। जीरो टैरिफ की सुविधा केवल उन निर्धारित उत्पादों पर लागू होगी, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति की अप्रैल में जारी घोषणा के तहत इस श्रेणी में शामिल किया गया है।

इन फार्मा उत्पादों को मिल सकती है छूट

जीरो टैरिफ के दायरे में दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ऑरफन ड्रग्स, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित थेरेपी, फर्टिलिटी मेडिसिन, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं।

इसके अलावा केमिकल, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने वाले कुछ मेडिकल उत्पादों तथा कुछ पशु स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को भी पात्र श्रेणी में रखा गया है।

भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड-लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम के कुछ पात्र उत्पाद भी इस व्यवस्था में शामिल हैं।

29 सितंबर से 100% टैरिफ का प्रावधान

अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति के तहत कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे संबंधित सामग्री पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था अमेरिकी व्यापार विस्तार कानून की धारा 232 के तहत लागू की जा रही है। इसके कुछ प्रावधान कंपनियों के लिए 31 जुलाई से प्रभावी हुए हैं, जबकि अन्य दायरे में आने वाले आयातकों के लिए 29 सितंबर से लागू होने हैं।

वहीं, जेनेरिक दवाओं और उनसे जुड़ी सामग्री को इस विशेष फार्मा टैरिफ से अलग रखा गया है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय फार्मा कंपनियां अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं की बड़ी आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हैं।

भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?

भारत दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा निर्माताओं में शामिल है और अमेरिकी बाजार में तैयार दवाओं के साथ-साथ एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स यानी API और विशेष उपचारों से जुड़े उत्पादों की भी आपूर्ति करता है।

ऐसे में जिन भारतीय कंपनियों के उत्पाद जीरो टैरिफ की निर्धारित सूची में आते हैं, उन्हें अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है। हालांकि, यह छूट पूरे भारतीय फार्मा सेक्टर पर लागू नहीं होगी और इसका लाभ केवल निर्धारित उत्पाद श्रेणियों तक सीमित रहेगा।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर अमेरिका का जोर

अमेरिका की व्यापक फार्मास्युटिकल नीति का एक प्रमुख लक्ष्य देश में दवाओं के उत्पादन को बढ़ाना और महत्वपूर्ण मेडिकल सप्लाई के लिए विदेशी निर्भरता कम करना है। इसलिए चुनिंदा फार्मा उत्पादों को दी गई टैरिफ छूट को अमेरिकी घरेलू विनिर्माण नीति में व्यापक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

भारत के लिए फिलहाल महत्वपूर्ण यह है कि विशेष श्रेणी में आने वाली कुछ दवाओं और फार्मा सामग्री को अमेरिकी बाजार में बिना अतिरिक्त टैरिफ प्रवेश का अवसर मिलेगा, जबकि अन्य उत्पादों पर लागू शुल्क संबंधी नियम पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।

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