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चांद पर भी होगी खेती! वैज्ञानिकों ने चांद जैसी मिट्टी में उगाया चना

75 प्रतिशत चांद की मिट्टी में सफल रही फसल, केंचुआ खाद और लाभकारी फफूंद ने निभाई अहम भूमिका

नई दिल्ली। चांद पर खेती करना अब केवल कल्पना नहीं रह गया है। वैज्ञानिकों ने चांद जैसी मिट्टी में चना उगाने में सफलता हासिल की है। अंतरिक्ष में खेती की संभावनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि भविष्य में चांद पर लंबे समय तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे वहां भोजन उगाने की दिशा में नई संभावनाएं खुली हैं।

अमेरिका की टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विशेष नियंत्रित वातावरण वाले कक्ष में चने की ‘माइल्स’ किस्म को उगाया। इस प्रयोग में फ्लोरिडा की एक कंपनी द्वारा तैयार की गई चांद जैसी मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। यह मिट्टी चांद की सतह पर पाई जाने वाली रेगोलिथ जैसी संरचना वाली है, जो नासा के अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाई गई मिट्टी के समान मानी जाती है।

75 प्रतिशत चांद की मिट्टी में उगा चना

प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने मिट्टी में केंचुआ खाद मिलाई। इसके अलावा चने के बीजों पर एक विशेष लाभकारी फफूंद की परत भी चढ़ाई गई। इस फफूंद का उद्देश्य पौधों को पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करना और हानिकारक धातुओं के प्रभाव को कम करना था।

शोधकर्ताओं ने पाया कि मिट्टी के मिश्रण में जब चांद की मिट्टी की मात्रा 75 प्रतिशत तक रही, तब चने के पौधों ने सफलतापूर्वक विकास किया। हालांकि, चांद की मिट्टी का अनुपात बढ़ने के साथ फसल की उत्पादकता में कमी देखने को मिली। इसके बावजूद जो चने विकसित हुए, उनका आकार सामान्य रहा।

वैज्ञानिकों ने 100 प्रतिशत चांद जैसी मिट्टी में भी चने के बीज लगाए। इस स्थिति में पौधे सामान्य रूप से विकसित नहीं हो सके। उनमें फूल और बीज नहीं बने तथा पौधे समय से पहले सूखकर मर गए।

भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण प्रयोग

अमेरिका और चीन सहित कई देश भविष्य में चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और वहां लंबे समय तक रहने वाले आधार केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे अभियानों के लिए भोजन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होगी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी से अंतरिक्ष यान के माध्यम से भोजन भेजना महंगा होने के साथ-साथ वजन और भंडारण की सीमाओं से भी जुड़ा है। ऐसे में चांद या मंगल पर स्थानीय स्तर पर भोजन उगाने की तकनीक विकसित करना महत्वपूर्ण होगा।

पौधे केवल भोजन उपलब्ध कराने में ही मदद नहीं करेंगे, बल्कि ऑक्सीजन उत्पादन और जीवन-समर्थन प्रणालियों को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकते हैं।

अभी चने को खाने की अनुमति नहीं

प्रयोग में चना उगाने में सफलता मिलने के बावजूद वैज्ञानिकों ने इसे खाने की अनुमति अभी नहीं दी है। शोधकर्ता चनों में मौजूद धातुओं और अन्य तत्वों की जांच कर रहे हैं।

चांद की मिट्टी में एल्युमिनियम और लोहे जैसी धातुएं पर्याप्त मात्रा में पाई जाती हैं। जहां लोहा पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में शामिल है, वहीं एल्युमिनियम अधिक मात्रा में मौजूद होने पर पौधों और मनुष्यों के लिए हानिकारक हो सकता है।

शोध की मुख्य लेखिका जेसिका एटकिन के अनुसार, जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि चांद जैसी मिट्टी में उगे चने पूरी तरह सुरक्षित और पौष्टिक हैं, तब तक उनका सेवन नहीं किया जाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि सुरक्षा संबंधी जांच की रिपोर्ट इस वर्ष के अंत तक सामने आ सकती है।

लाभकारी फफूंद ने निभाई अहम भूमिका

इस प्रयोग में चने के बीजों पर लगाई गई लाभकारी फफूंद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सूक्ष्मजीव ने पौधों को मिट्टी से आवश्यक पोषक तत्व हासिल करने में मदद की और कुछ हानिकारक धातुओं के पौधे में प्रवेश को सीमित किया।

चांद की रेगोलिथ मिट्टी पृथ्वी की सामान्य मिट्टी से काफी अलग होती है। यह मुख्य रूप से उल्कापिंडों के टकराने से बने महीन पत्थरों और कांच जैसे कणों से बनी होती है। लाभकारी सूक्ष्मजीवों की मदद से इस मिट्टी को पौधों के लिए अधिक अनुकूल बनाने की संभावना दिखाई दी है।

‘चांद पर उगते चने’ ने बढ़ाया उत्साह

प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने इस अनोखे प्रयोग को लेकर उत्साहपूर्ण माहौल भी बनाए रखा। शोधकर्ता जेसिका एटकिन ने पौधों के लिए चांद से जुड़े गीत बजाए और प्रयोगशाला में ‘चांद पर उगते चने’ की तस्वीर भी लगाई।

वैज्ञानिकों के लिए यह प्रयोग भले ही शुरुआती चरण में हो, लेकिन इसे भविष्य में चांद और मंगल पर खेती की संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

चांद की मिट्टी में फसल उगाने की यह सफलता अभी अंतिम समाधान नहीं है। हालांकि, इस प्रयोग ने यह संकेत जरूर दिया है कि उचित जैविक खाद, सूक्ष्मजीवों और नियंत्रित वातावरण की मदद से भविष्य में पृथ्वी से बाहर भी खेती की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

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