
48 घंटे में सर्वेयर की नियुक्ति और सर्वेक्षण के बाद 15 दिनों में बीमा दावा भुगतान का प्रावधान, कृषि विभाग ने तेज की कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न जिलों में खेतों में खड़ी फसलों और कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई उपज को नुकसान पहुंचने की सूचनाएं मिली हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने फसल क्षति का आकलन और बीमा दावा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक फसल नुकसान की 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें से 88 मामलों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष मामलों में सर्वेक्षण की कार्रवाई जारी है। राज्य शासन ने सभी जिला कलेक्टरों, कृषि विभाग के अधिकारियों और संबंधित बीमा कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा में नुकसान का आकलन पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
बीमा कंपनियों को समय पर कार्रवाई के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी के मार्गदर्शन में विभागीय अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को शीघ्र बीमा राशि उपलब्ध कराई जाए।
11 फसलें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल
प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी सहित कुल 11 फसलें अधिसूचित हैं। योजना के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय आपदा और कटाई के बाद होने वाले नुकसान की निर्धारित परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा का लाभ मिलता है।
जलप्लावन से होने वाली स्थानीय क्षति के मामले में धान की सिंचित एवं असिंचित फसल को छोड़कर अन्य अधिसूचित फसलों के लिए नियमानुसार दावा किया जा सकता है। वहीं कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को कटाई के 14 दिनों के भीतर चक्रवात, चक्रवाती वर्षा अथवा बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार बीमा सुरक्षा मिलती है।
किसान 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं नुकसान की सूचना
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि फसल क्षति होने पर 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना दर्ज कराएं। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद 10 दिनों के भीतर सर्वेक्षण पूरा करने तथा सर्वेक्षण के उपरांत 15 दिनों के भीतर पात्र बीमा दावा राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भुगतान करने का प्रावधान है।
कृषि अधिकारियों से भी ले सकते हैं सहायता
फसल नुकसान की सूचना और बीमा दावा प्रक्रिया से संबंधित जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, उप संचालक कृषि अथवा संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय बनाकर सर्वेक्षण एवं भुगतान की प्रक्रिया को गति दी जा रही है, ताकि पात्र किसानों को समय पर सहायता मिल सके और वे आगामी कृषि कार्यों को जारी रख सकें।




