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आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलने के निर्णय पर आदिवासी कांग्रेस का कड़ा विरोध — सरकार तत्काल निर्णय वापस ले : कुलदीप ध्रुव

आदिवासी समाज की पहचान, अस्मिता और गौरवशाली विरासत के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के संगठन महासचिव कुलदीप ध्रुव ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किए जाने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे आदिवासी समाज की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषय पर अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए विभाग का पूर्व नाम बहाल किया जाए।

कुलदीप ध्रुव ने कहा कि आदिवासी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारी हजारों वर्षों की संस्कृति, परंपरा, इतिहास, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली और सामुदायिक अस्मिता का प्रतीक है। इस शब्द से आदिवासी समाज की भावनाएं, पहचान और गौरव जुड़ा हुआ है। इसलिए विभाग के नाम में बदलाव को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे संवेदनशील विषयों पर निर्णय लेने से पहले आदिवासी समाज, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के आदिवासी समाज, उसकी समृद्ध संस्कृति और जल-जंगल-जमीन से जुड़े उसके ऐतिहासिक अधिकारों से है। राज्य सरकार को इन मूल सवालों पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रावासों की बेहतर व्यवस्था, युवाओं के लिए रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, सड़क, बिजली और वनाधिकारों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

*कुलदीप ध्रुव ने सवाल उठाया कि जब आदिवासी समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, विस्थापन, वनाधिकार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सरकार की प्राथमिकता नाम बदलने के बजाय इन समस्याओं का ठोस समाधान होना चाहिए।* समाज को वास्तविक विकास, सम्मान और अधिकार चाहिए, केवल शब्दों में बदलाव नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और सम्मान से जुड़े फैसले समाज की भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। लोकतंत्र में सरकार का दायित्व केवल निर्णय लेना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की बात सुनना और उनकी भावनाओं का सम्मान करना भी है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस की ओर से कुलदीप ध्रुव ने राज्य सरकार से मांग की कि—

1. आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलने के निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।
2. इस विषय पर आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक संवाद किया जाए।
3. आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
4. आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल, सड़क, छात्रावास और वनाधिकार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।

अंत में कुलदीप ध्रुव ने कहा कि *“आदिवासी समाज की अस्मिता कोई प्रशासनिक शब्द नहीं, बल्कि हमारी पहचान और स्वाभिमान का आधार है। विकास के नाम पर समाज की भावनाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सरकार को नाम बदलने की राजनीति से आगे बढ़कर आदिवासी समाज के वास्तविक विकास, सम्मान और अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए। हम आदिवासी समाज की आवाज, उसके संवैधानिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात मजबूती से उठाते रहेंगे।”*

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