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महिलाओं में ब्लड क्लॉट का खतरा क्यों बढ़ता है? जानें 6 बड़े कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

हर साल 13 अक्टूबर को वर्ल्ड थ्रोम्बोसिस डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को खून के थक्के यानी ब्लड क्लॉट से जुड़े जोखिम, लक्षणों और बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है। महिलाओं में गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और कुछ हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ा सकता है। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता है।

ब्लड क्लॉट क्या है और यह कितना खतरनाक है?

जब खून नसों या धमनियों के अंदर जमकर थक्का बना लेता है, तो इस स्थिति को थ्रोम्बोसिस कहा जाता है। इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। अगर थक्का पैरों की गहरी नसों में बनता है, तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहते हैं। वहीं, थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म हो सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है।

महिलाओं में ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ाने वाले 6 कारण

1. गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद

गर्भावस्था के दौरान शरीर में ऐसे प्राकृतिक बदलाव होते हैं, जो प्रसव के समय ज्यादा खून बहने से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि, इन बदलावों के कारण ब्लड क्लॉट बनने की आशंका भी बढ़ जाती है। डिलीवरी के बाद शुरुआती तीन महीनों में भी इसका जोखिम बना रह सकता है।

2. हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां

एस्ट्रोजन युक्त कुछ गर्भनिरोधक गोलियां, पैच और अन्य हार्मोनल उपचार ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ा सकते हैं। हालांकि, जोखिम महिला की उम्र, स्वास्थ्य, धूम्रपान की आदत और मेडिकल हिस्ट्री पर भी निर्भर करता है। हार्मोनल दवाएं लेने से पहले डॉक्टर से अपनी स्थिति पर चर्चा करना जरूरी है।

3. लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना

लंबी हवाई या सड़क यात्रा, लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करना और बीमारी के कारण लंबे समय तक बिस्तर पर रहना ब्लड क्लॉट का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में पैरों की नसों में रक्त का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।

4. सर्जरी या अस्पताल में भर्ती होना

बड़ी सर्जरी, चोट लगने या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ब्लड क्लॉट बनने की आशंका बढ़ सकती है। खासकर तब, जब व्यक्ति लंबे समय तक चलने-फिरने में असमर्थ हो। ऐसे मामलों में डॉक्टर जोखिम के अनुसार बचाव के उपाय सुझा सकते हैं।

5. मोटापा और कुछ गंभीर बीमारियां

मोटापा, कैंसर और हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियां ब्लड क्लॉट के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। जिन लोगों को पहले भी ब्लड क्लॉट हो चुका है या परिवार में इसका इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

6. बढ़ती उम्र और धूम्रपान

उम्र बढ़ने के साथ ब्लड क्लॉट का जोखिम बढ़ सकता है। धूम्रपान भी रक्त वाहिकाओं और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इसलिए धूम्रपान से दूरी बनाना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना महत्वपूर्ण है।

ब्लड क्लॉट के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें?

पैरों या हाथों की गहरी नसों में थक्का बनने पर कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • एक पैर या हाथ में अचानक सूजन आना।
  • प्रभावित हिस्से में दर्द या छूने पर संवेदनशीलता होना।
  • त्वचा का गर्म महसूस होना।
  • त्वचा का लाल या बदरंग पड़ना।

हालांकि, हर व्यक्ति में ये सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। यदि एक पैर में अचानक सूजन या दर्द हो, तो जल्द से जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं।

सांस फूलने या सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज

यदि खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:

  • अचानक सांस लेने में परेशानी होना।
  • सीने में दर्द, खासकर गहरी सांस लेने पर।
  • खांसी के साथ खून आना।
  • दिल की धड़कन तेज होना।
  • चक्कर आना या बेहोशी होना।

ध्यान दें: इनमें से कोई लक्षण अचानक दिखाई दे, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें। घर पर इलाज करने या लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार करने से बचें।

ब्लड क्लॉट से बचाव के लिए अपनाएं ये 5 उपाय

  1. नियमित रूप से चलें-फिरें: लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें। यात्रा के दौरान, संभव हो तो हर एक से दो घंटे में उठकर चलें।
  2. पैरों को सक्रिय रखें: लंबे समय तक बैठे रहने पर टखनों को घुमाएं और पैरों को आगे-पीछे हिलाते रहें।
  3. शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम और पैदल चलने की आदत बनाएं।
  4. सर्जरी से पहले डॉक्टर से बात करें: अस्पताल में भर्ती होने या ऑपरेशन की स्थिति में ब्लड क्लॉट के जोखिम और रोकथाम के उपायों की जानकारी लें।
  5. गर्भावस्था और हार्मोनल दवाओं के दौरान सावधानी बरतें: अपने व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर से सलाह लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के खून पतला करने वाली दवाएं न लें।

निष्कर्ष

महिलाओं में ब्लड क्लॉट का खतरा जीवन के अलग-अलग चरणों में बदल सकता है। गर्भावस्था, प्रसव के बाद का समय, हार्मोनल गर्भनिरोधक, सर्जरी और लंबे समय तक निष्क्रिय रहना इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके लक्षणों को समय पर पहचानना और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज कराना गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है।

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