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तीन साल में 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, किसानों को मिला 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए कई पहल, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी; कृषक उन्नति योजना से 25 लाख से अधिक किसानों को मिला लाभ

रायपुर । छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते तीन वर्षों के दौरान धान खरीदी, आर्थिक सहायता, कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई सुविधाओं और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन तीन वर्षों में प्रदेश में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।

तीन साल में 437 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन

प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में 144.92 लाख मीट्रिक टन, 2024-25 में 149.25 लाख मीट्रिक टन और 2025-26 में लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। इस तरह तीन खरीफ सीजन में कुल करीब 437 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया। इसके एवज में किसानों को लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

धान खरीदी के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया है। इस बार 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा। खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट दी गई है। उन्हें धान बेचने के लिए समिति में ऋण पुस्तिका लाने की भी जरूरत नहीं होगी।

डिजिटल क्रॉप सर्वे के जरिए रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित खरीदी व्यवस्था लागू की जाएगी। किसानों की सुविधा के लिए 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी होगी।

कृषक उन्नति योजना से 35,904 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने के लिए संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,904.90 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं, धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत भी प्रदेश के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है।

खेती में आधुनिक मशीनों और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार

कृषि कार्यों को आसान बनाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए वर्ष 2024-25 से अब तक 8,567 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है। इसके लिए किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।

डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एग्रीस्टैक के तहत 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की गई है और 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया जा चुका है।

दलहन और तिलहन की खेती को भी मिल रहा प्रोत्साहन

धान के साथ दूसरी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत प्रदेश के 29 जिलों में 273 केंद्रों के माध्यम से अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी की गई। इसके एवज में किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है। इससे तिलहन उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की योजना है।

फसल बीमा और उर्वरक उपलब्धता पर भी जोर

किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ एवं रबी 2025-26 में 16.70 लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया। इनमें से 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया।

वहीं, खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 15.55 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया। उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए भी निरीक्षण और कार्रवाई की गई।

किसानों की समृद्धि से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ में करीब 40 लाख कृषक परिवार हैं और इनमें 82 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र का विकास प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। धान खरीदी से लेकर आर्थिक सहायता, आधुनिक कृषि उपकरण, सिंचाई सुविधाओं और फसल विविधीकरण तक किए जा रहे प्रयासों को राज्योत्सव के दौरान भी रेखांकित किया जाएगा।

सरकार की इन पहलों का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम करना है।

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