
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में इस बार बस्तर की बदलती तस्वीर खास आकर्षण का केंद्र बनेगी। कभी नक्सलवाद के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में अब शांति, पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं किस तरह आकार ले रही हैं, इसकी झलक वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी में देखने को मिलेगी। ‘बदलता बस्तर, संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर तैयार इस प्रदर्शनी में पर्यटन विकास, वन्यजीव संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनी में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल को विशेष स्थान दिया गया है। मॉडल, चित्रों और डिजिटल माध्यमों से बताया जाएगा कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में पर्यटन किस तरह स्थानीय लोगों की आय का नया साधन बन रहा है।
बस्तर के पर्यटन स्थलों की दिखेगी आकर्षक झलक
प्रदर्शनी में कांगेर घाटी की जंगल सफारी और प्राकृतिक गुफाओं के साथ कोंडागांव की पुष्पाल घाटी में स्टार गेजिंग, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका और सुकमा के तुंगल डैम को मॉडल के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। धुड़मारास के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण को भी प्रमुखता मिलेगी। इसके माध्यम से बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय परंपराओं और पर्यटन आधारित आजीविका की संभावनाओं को सामने लाया जाएगा।
10 महिलाओं ने संभाली तुंगल कैफे की जिम्मेदारी
महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी सुकमा का तुंगल कैफे होगा, जहां मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं मिलकर कैफे का संचालन कर रही हैं। यह पहल महिलाओं के आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन रही है।
वहीं, कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से उपलब्ध कराए गए 35 जिप्सी वाहनों के माध्यम से करीब 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। तुंगल में नौका विहार और कयाकिंग जैसी गतिविधियों से भी युवा आय अर्जित कर रहे हैं। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
काले हिरण की वापसी से लेकर गिद्ध संरक्षण तक की पहल
वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियां भी प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। बारनवापारा में दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण और छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। बारनवापारा में काले हिरण की वापसी का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया था।
इसके साथ धमतरी के ठेमली द्वीप को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने और मानव तथा वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया जाएगा। प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय तितली के रूप में अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।
वनोपज बनेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत
वनांचल में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने के लिए लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाइयों, छत्तीसगढ़ हर्बल्स और छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की योजनाओं की जानकारी मिलेगी। दर्शकों को विभिन्न वन उत्पादों को देखने और खरीदने का अवसर भी मिलेगा।
क्विज प्रतियोगिता से बच्चों और युवाओं को जोड़ने की पहल
प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक और रोचक बनाने के लिए बच्चों एवं युवाओं के लिए वन, वन्यजीव और बस्तर पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सही जवाब देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके अलावा क्यूआर कोड स्कैन करके दर्शक प्रदेश के इको-पर्यटन स्थलों, वहां पहुंचने के रास्तों, उपलब्ध सुविधाओं और बुकिंग से संबंधित जानकारी मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे।
तीन विशेष द्वारों में दिखेगी बस्तर की पहचान
करीब 88 गुणा 30 फीट क्षेत्र में तैयार किए जा रहे प्रदर्शनी मंडप को बस्तर की संस्कृति और विरासत के अनुरूप सजाया जाएगा। इसमें तीन विशेष द्वार बनाए जाएंगे। दंतेवाड़ा के वन मंदिर, जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका और बस्तर के प्रसिद्ध टाइगर बॉय चेंदरू की स्मृति में चेंदरू द्वार के जरिए आस्था, जनजातीय गौरव और वन्यजीवन की झलक प्रस्तुत की जाएगी। एलईडी स्क्रीन पर बस्तर में आए बदलाव और विकास की यात्रा पर आधारित लघु फिल्में भी दिखाई जाएंगी।
राज्योत्सव की यह प्रदर्शनी केवल सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि बस्तर में बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश की कहानी भी बयां करेगी। पर्यटन, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार और वन संरक्षण के माध्यम से संवरते छत्तीसगढ़ की तस्वीर यहां देखने को मिलेगी।




