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करमा महोत्सव में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणाएं, कंवर समाज को 90 लाख और हर साल आयोजन के लिए 10 लाख रुपये

रायपुर में करमा परब महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, सामाजिक भवनों और सांस्कृतिक मंच के निर्माण के लिए राशि देने का किया ऐलान; युवाओं से शिक्षा, नशामुक्ति और संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित करमा परब महोत्सव में कंवर समाज के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने समाज के सामाजिक भवनों और सांस्कृतिक मंच के निर्माण के लिए कुल 90 लाख रुपये देने के साथ ही राजधानी में हर साल करमा महोत्सव आयोजित करने के लिए 10 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, युवाओं को शिक्षा से जोड़ने, नशामुक्ति को बढ़ावा देने और सामाजिक एकजुटता मजबूत करने का आह्वान किया।

कंवर समाज के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं

रायपुर के बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज युवा प्रभाग, महानगर इकाई द्वारा भव्य करमा परब महोत्सव आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और समाजजनों को करमा तिहार की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कंवर समाज के लिए निम्नलिखित घोषणाएं कीं:

  • 50 लाख रुपये: कोरबा जिले के मड़वारानी में सामाजिक भवन निर्माण के लिए।
  • 25 लाख रुपये: रायपुर के टाटीबंध में सामाजिक भवन निर्माण के लिए।
  • 15 लाख रुपये: कांकेर जिले के ग्राम जेफरा में सांस्कृतिक मंच निर्माण के लिए।
  • 10 लाख रुपये: राजधानी रायपुर में प्रतिवर्ष करमा महोत्सव के आयोजन के लिए।

मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए कंवर समाज युवा प्रभाग और सामाजिक पदाधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना किसी भी समाज की वास्तविक ताकत है।

प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक है करमा तिहार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि करमा तिहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस पर्व में करम डार की पूजा की जाती है। समाज के लोग उपवास रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और रात में पारंपरिक करमा गीतों व नृत्य के माध्यम से उत्सव मनाते हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपराएं प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ जनजातीय समुदाय का रिश्ता केवल जरूरतों तक सीमित नहीं, बल्कि आस्था और आत्मीयता से भी जुड़ा है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

युवाओं से शिक्षा और नशामुक्ति अपनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने कंवर समाज में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और नशामुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संस्कार, संगठन और जागरूकता जरूरी हैं।

उन्होंने युवाओं से आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को बनाए रखने, नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी अपनी विरासत को सहेजने के साथ सामाजिक सुधार और एकजुटता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जनजातीय समाज के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और गांवों के समग्र विकास पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से बंद स्कूलों को फिर शुरू किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय युवाओं के लिए दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई है। इसके साथ ही रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार और खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।

किसानों और वनांचल के परिवारों के लिए योजनाओं का उल्लेख

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों और वनांचल में रहने वाले परिवारों के हित में उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर किसानों के खातों में 3,716 करोड़ रुपये की राशि अंतरित किए जाने का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। चरण पादुका योजना को फिर शुरू करने, महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना और पात्र भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की सहायता देने वाली योजना का भी उल्लेख किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसानों, महिलाओं, युवाओं और जनजातीय परिवारों को विकास के बेहतर अवसर मिलें।

संस्कृति संरक्षण के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प

अखिल भारतीय कंवर समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष कौशल्या साय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के साथ प्रकृति संरक्षण को सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

कार्यक्रम में जनजातीय समाज से जुड़े विभिन्न जनप्रतिनिधि, सामाजिक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री साय ने अंत में युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए सामाजिक एकता और विकास के प्रयासों में योगदान देना ही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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