
रायपुर । बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सुरक्षा कैंपों को जनसेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के नाम से संचालित इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक ही विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके पहले चरण में 70 कैंपों को इस स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से डिजिटल सुविधाओं, बैंकिंग सेवाओं, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है।
गांवों में उपलब्ध हो रहीं डिजिटल सुविधाएं
पहले ग्रामीणों को आधार कार्ड बनवाने, बैंकिंग संबंधी कार्यों और विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए दूरस्थ कार्यालयों तक जाना पड़ता था। सेवा डेरा के माध्यम से आधार संबंधी सेवाओं, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक कराने तथा जन्म, मृत्यु, आय और जाति प्रमाण पत्र जैसी ऑनलाइन सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों के समय और यात्रा खर्च में कमी आने की उम्मीद है।
बैंक सखी के जरिए ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधा
सेवा डेरा के अंतर्गत महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही पैसे निकालने, जमा करने और बैंक खातों से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही स्वास्थ्य परामर्श, आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा जैसी सेवाओं को भी ग्रामीणों के करीब लाने की पहल की जा रही है।
महिला स्व-सहायता समूहों को मिल रहा स्वरोजगार का अवसर
सेवा डेरा के माध्यम से स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर इमली पल्प तैयार कर रही हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के अनुसार, इस गतिविधि से महिलाओं के लिए सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की संभावना बन रही है।
पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार कर उसकी बिक्री करने जैसी गतिविधियों से भी महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल रहा है। वहीं, सिलाई प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को कौशल विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर जोर
बस्तर के स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की एक टीम ने नेतानार पहुंचकर सिलाई, इमली प्रसंस्करण और पारंपरिक ढेंकी से जुड़े कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग और बाजार में उनकी पहचान बढ़ाने के संबंध में चर्चा की गई।
विकास योजनाओं से जुड़ रहा बस्तर
राज्य सरकार की नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है। कृषि, पशुपालन और सिंचाई से संबंधित योजनाओं के जरिए ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा के रूप में विकसित करने की पहल बस्तर के दूरस्थ गांवों में प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। इसके प्रभाव का आकलन योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन और ग्रामीणों तक पहुंचने वाले लाभों के आधार पर किया जा सकेगा।




