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बेमेतरा में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत किसानों को किया जागरूक, प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर

रायपुर । फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने और कृषि उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से बेमेतरा जिले में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बेमेतरा और कृषि विभाग के सहयोग से ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत ग्राम दर्री और ग्राम पतोरा में ये कार्यक्रम आयोजित किए।

कार्यक्रम ग्राम दर्री, विकासखंड साजा और ग्राम पतोरा, विकासखंड बेरला में हुए। दोनों स्थानों पर कुल 90 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 80 पुरुष और 10 महिला किसान शामिल थीं। इनमें दर्री से 48 और पतोरा से 42 किसानों की सहभागिता रही।

कीट एवं रोग प्रबंधन की दी वैज्ञानिक जानकारी

कार्यक्रम में ICAR-NIBSM के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार शर्मा और वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका मीना सहित कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार जोशी, श्री डोमन सिंह टेकाम तथा कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। ग्राम दर्री के सरपंच तोरण यादव और ग्राम पतोरा की सरपंच नामिन बाई साहू ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों में कीट एवं रोगों की समय पर पहचान, समन्वित कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने के तरीकों की जानकारी दी। साथ ही जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक कीटनाशकों का जरूरत के अनुसार विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी गई।

किसानों को बताया गया कि फसलों की नियमित निगरानी और शुरुआती लक्षणों की पहचान से नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

किसान-वैज्ञानिक संवाद में साझा की समस्याएं

कार्यक्रम के दौरान किसान-वैज्ञानिक संवाद भी आयोजित किया गया। इसमें किसानों ने खेती से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों को विशेषज्ञों के सामने रखा। कृषि विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव देते हुए कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, फसल नुकसान कम करने और पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रकाशन का वितरण

‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस दौरान प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रकाशन भी वितरित किया गया, ताकि किसान इस पद्धति के बारे में अधिक जानकारी हासिल कर सकें।

अभियान का उद्देश्य फसलों को जैविक और अजैविक तनावों से सुरक्षित रखने, कीट एवं रोगों से होने वाली क्षति कम करने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाना है। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रमों से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद मजबूत होता है और किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में उपयोगी जानकारी मिलती है।

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