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रायपुर में प्रसूता को मिला नया जीवन, स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर निःशुल्क लगाया गया आईसीडी पेसमेकर

रायपुर । प्रसव के बाद गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रही एक महिला को रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में उपचार मिला। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने दो चरणों में इलाज किया। पहले आपातकालीन स्थिति में टेम्पररी पेसमेकर लगाया गया और बाद में स्थिति स्थिर होने पर इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (आईसीडी) पेसमेकर का निःशुल्क प्रत्यारोपण किया गया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर मरीज के उपचार का खर्च उठाने की व्यवस्था की गई।

हृदय की धड़कन घटकर 40 प्रति मिनट रह गई थी

महिला की डिलीवरी कोरबा में सिजेरियन ऑपरेशन से हुई थी। प्रसव के बाद उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी और हृदय की धड़कन असामान्य रूप से कम हो गई। जांच में कंप्लीट हार्ट ब्लॉक के साथ पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी और वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया जैसी गंभीर समस्याओं का पता चला।

चिकित्सकों के अनुसार, मरीज के हृदय की धड़कन लगभग 40 प्रति मिनट रह गई थी, जबकि रक्त पंप करने की क्षमता घटकर करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया के कारण उसकी धड़कन अचानक तेज और अनियंत्रित हो जाती थी, जिससे बेहोशी की स्थिति भी बन रही थी। यह स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

पहले आपातकालीन पेसमेकर, फिर आईसीडी प्रत्यारोपण

मरीज को गंभीर हालत में अंबेडकर अस्पताल लाया गया, जहां कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। हृदय की धीमी धड़कन और कंप्लीट हार्ट ब्लॉक को देखते हुए पहले टेम्पररी पेसमेकर लगाया गया। अनियंत्रित और खतरनाक हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रिक शॉक भी दिया गया।

मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद भविष्य में जानलेवा हृदय गति संबंधी समस्या से बचाव के लिए आईसीडी पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। यह उपकरण हृदय की खतरनाक तेज धड़कन का पता लगाकर जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक शॉक देता है, जिससे हृदय की लय सामान्य करने में मदद मिलती है।

स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर निःशुल्क उपचार

मरीज की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और कमजोर आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के संज्ञान में मामला लाया गया। उनकी पहल पर उपचार का खर्च उठाने की व्यवस्था की गई और आईसीडी पेसमेकर निःशुल्क लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

बताया गया कि निजी अस्पताल में इस तरह के उपचार पर लगभग साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। मरीज का उपचार अंबेडकर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया।

चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने और उपचार की प्रगति की नियमित जानकारी लेने के निर्देश दिए।

क्या है पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी?

पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी हृदय से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो गर्भावस्था के अंतिम चरण या प्रसव के आसपास विकसित हो सकती है। इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर में रक्त पंप करने की क्षमता कम हो जाती है। इसके प्रमुख लक्षणों में सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पैरों में सूजन और हृदय गति में बदलाव शामिल हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर हृदय विफलता का कारण बन सकती है।

मरीज की हालत में सुधार

वर्तमान में महिला की स्थिति ठीक बताई जा रही है और वह चिकित्सकों की निगरानी में है। स्वास्थ्य में सुधार जारी रहने पर उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है। चिकित्सकों ने समय पर आपातकालीन उपचार और आगे की जटिलताओं से बचाव के लिए किए गए आईसीडी प्रत्यारोपण को इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

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