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बिहान योजना से बदली सुमित्रा यादव की जिंदगी, चार व्यवसायों से सालाना आय 7.60 लाख रुपये के पार

रायपुर । मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिल जाएं, तो आर्थिक चुनौतियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। कोरिया जिले के ग्राम कंचनपुर की सुमित्रा यादव ने इसे सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने अपने परिवार की आजीविका को खेती तक सीमित न रखते हुए चार अलग-अलग व्यवसायों तक पहुंचाया। आज उनका परिवार सालाना 7 लाख 60 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहा है।

खेती पर निर्भर था परिवार

बिहान योजना से जुड़ने से पहले सुमित्रा यादव का परिवार मुख्य रूप से कृषि कार्य पर निर्भर था। परिवार ने ऋण लेकर एक ट्रैक्टर खरीदा था, जिसका इस्तेमाल खेती और उससे जुड़े कार्यों में किया जाता था। हालांकि, कृषि से होने वाली आय सीमित होने के साथ मौसम पर भी निर्भर थी। ऐसे में परिवार के लिए आर्थिक जरूरतों को पूरा करना और भविष्य के लिए बचत करना चुनौती बना हुआ था।

महिला स्व-सहायता समूह से मिली नई राह

सुमित्रा यादव के जीवन में बदलाव की शुरुआत शक्ति महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद हुई। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग और आजीविका बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने समूह से ढाई लाख रुपये का ऋण लेकर परिवार के साथ मिलकर नए व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

इस आर्थिक सहयोग और परिवार की मेहनत से उन्होंने सेंट्रिंग प्लेट, टेंट हाउस, ट्रैक्टर और मिक्सर मशीन से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कीं। निर्माण कार्यों में सेंट्रिंग प्लेट और मिक्सर मशीन की जरूरत के साथ सामाजिक व पारिवारिक आयोजनों में टेंट हाउस की मांग ने उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद की।

इन सभी कामों में उनके पति और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। परिवार ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आय के नए रास्ते तैयार किए।

सालाना आय 7.60 लाख रुपये से अधिक

सुमित्रा यादव के परिवार की वार्षिक आय अब 7 लाख 60 हजार रुपये से अधिक हो गई है। पहले जहां परिवार की कमाई मुख्य रूप से खेती और ट्रैक्टर से जुड़े कामों पर निर्भर थी, वहीं अब कई व्यवसायों से आय होने के कारण आर्थिक स्थिरता बढ़ी है।

इस बदलाव ने परिवार को भविष्य की योजनाएं बनाने और अपनी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने का अवसर दिया है। साथ ही, सुमित्रा की भूमिका भी खेती और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित न रहकर व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी तक पहुंच गई है।

महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल

सुमित्रा यादव की सफलता दिखाती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला वित्तीय सहयोग ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर खोल सकता है। परिवार के सहयोग, मेहनत और व्यवसायों में विविधता लाकर उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं को उद्यम शुरू करने, उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित करती है।

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