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रुपया फिर कमजोर, 96.25 प्रति डॉलर पर पहुंचा; कच्चे तेल और विदेशी बिकवाली का दबाव

नई दिल्ली: भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे कमजोर होकर 96.25 के स्तर पर बंद हुआ। यह करीब दो महीने का सबसे निचला स्तर है। बाजार में डॉलर की बढ़ती मांग, कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ाया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.95 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह कमजोर होकर 96.34 के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से हाजिर और वायदा बाजार में डॉलर की बिक्री से रुपये की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।

इससे एक दिन पहले बुधवार को रुपया 95.95 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ था।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ी डॉलर की मांग

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी भी रुपये के लिए दबाव का कारण बनी। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 10,148.41 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पैसा निकालने पर रुपये को डॉलर में बदला जाता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

रुपये की कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी एक प्रमुख वजह हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.5 फीसदी बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर आयात के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है।

अमेरिका-ईरान तनाव पर बाजार की नजर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बना सकते हैं, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने भी डॉलर को समर्थन दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.34 फीसदी तक पहुंच गई। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर आधारित निवेश की मांग प्रभावित हो सकती है, जिसका असर भारतीय रुपये समेत अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर पड़ता है।

96.50 का स्तर अहम

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये के लिए 96.50 प्रति डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके ऊपर लगातार कमजोरी आने पर 98 रुपये प्रति डॉलर की दिशा में दबाव बढ़ सकता है। वहीं, 95.50 का स्तर रुपये के लिए अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है।

हालांकि, आगे रुपये की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेश और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

शेयर बाजार में भी गिरावट

रुपये की कमजोरी के साथ घरेलू शेयर बाजार पर भी दबाव रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 571 अंक गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी की गिरावट के साथ 22,421.95 पर बंद हुआ।

महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया। आयातकों की डॉलर मांग मजबूत रहने और निर्यातकों की हेजिंग रणनीति में सतर्कता के चलते आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियां महत्वपूर्ण बनी रह सकती हैं।

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