
Paper vs Plastic Notes: आजकल हमारे रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले कागज के नोट बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं. खासकर 10 रुपये और 20 रुपये जैसे नोट, जो बार-बार हाथों में आते-जाते रहते हैं, वे कुछ ही महीनों में काले, मैले, फटे-पुराने और खराब हो जाते हैं. इसी समस्या को देखते हुए अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI एक बार फिर प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर कागज के नोट और प्लास्टिक के नोट में कितना फर्क होता है, और क्या प्लास्टिक का नोट कागज के नोट से लंबे समय तक चल सकता है, आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
कागज के नोट के मुकाबले कितनी लंबी होती है प्लास्टिक नोट की उम्र
सामान्य तौर पर देखा जाए तो कागज यानी कॉटन से बने नोट सिर्फ डेढ़ से दो साल तक ही सही हालत में चल पाते हैं और छोटे नोटों की उम्र तो इससे भी कम होती है. वहीं दूसरी तरफ प्लास्टिक के नोट कागज के नोट से करीब ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं. कई बार तो ये नोट सात साल या उससे भी ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर सकता हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि प्लास्टिक के नोट पानी, पसीना और गंदगी को आसानी से सोखते नहीं हैं, जिससे ये जल्दी खराब नहीं होते हैं.
साथ ही, ये नोट फटते भी कम हैं और ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं. कुछ देशों में तो प्लास्टिक के नोट को कपड़े धोने वाली मशीन में डाल देने के बाद भी वे खराब नहीं होते.
भारत में कब हुई थी शुरुआत और अब क्या है योजना
साल 2012-13 में सरकार ने 10 रुपये के प्लास्टिक नोट का एक ट्रायल शुरू किया था, जिसे कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला जैसे पांच शहरों में अलग-अलग मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए टेस्ट किया गया था. हालांकि उस समय कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी. हालांकि प्लास्टिक के नोट छापना महंगा पड़ता है, लेकिन क्योंकि ये लंबे समय तक चलते हैं, इसलिए आगे चलकर इनसे सरकार का खर्च कम होगा. साथ ही, प्लास्टिक के नोटों में नकली नोट बनाने वालों के लिए भी नकल करना काफी मुश्किल हो जाता है.




