
अंकुश पंघल ने दक्षिण कोरियाई बॉक्सर को हराया
पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में भारत के अंकुश पंघल का सामना दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग से हुआ। अंकुश ने मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4-0 से जीत दर्ज की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
यह एशियन गेम्स में अंकुश का पहला गोल्ड मेडल है। उनकी जीत के साथ भारतीय पुरुष बॉक्सिंग को 2018 के बाद एशियन गेम्स में फिर स्वर्ण पदक मिला।
लवलीना और परवीन ने भी जीता गोल्ड
अंकुश से पहले लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं की 75 किलोग्राम कैटेगरी और परवीन हुड्डा ने 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इस तरह भारतीय बॉक्सिंग टीम ने तीन गोल्ड और तीन ब्रॉन्ज के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय बॉक्सिंग टीम के लिए यह प्रदर्शन खास रहा। छह पदकों के साथ भारत की मेडल टैली में भी इसका फायदा देखने को मिला।
शानदार फॉर्म में हैं अंकुश
अंकुश पंघल का हालिया प्रदर्शन लगातार सुर्खियों में रहा है। इससे पहले उन्होंने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। अब एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।
कबड्डी से बॉक्सिंग तक का सफर
हरियाणा के हिसार से आने वाले अंकुश पंघल का जन्म 13 अगस्त 2005 को एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं। अंकुश ने भी शुरुआत में कबड्डी खेली और जिला स्तर पर स्वर्ण पदक जीता था।
बाद में पिता की सलाह पर उन्होंने बॉक्सिंग को अपना खेल बनाया। कुछ ही वर्षों में अंकुश ने इस खेल में अपनी अलग पहचान बनाई और अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।



