
रायपुर । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोएडा के एक कारोबारी से 500 करोड़ रुपये का सरकारी ठेका दिलाने का झांसा देकर 15 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य मिलने के बाद की गई इस कार्रवाई के तहत ईडी ने आरोपी को विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया, जहां से पूछताछ के लिए 7 अगस्त तक की रिमांड मंजूर की गई है।
ईडी के अनुसार, केके श्रीवास्तव पर ठगी की रकम को विभिन्न माध्यमों से खपाने और उसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है। एजेंसी अब धन के स्रोत, लेन-देन और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच में सामने आया है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान केके श्रीवास्तव की कई प्रभावशाली नेताओं तक पहुंच थी। इसी प्रभाव का हवाला देकर उसने नोएडा स्थित रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 500 करोड़ रुपये का ठेका दिलाने का भरोसा दिलाया। इस झांसे में आकर कारोबारी ने कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये आरोपी को दे दिए।
मामले का खुलासा होने के बाद तेलीबांधा थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर के बाद केके श्रीवास्तव अपने बेटे कंचन श्रीवास्तव के साथ फरार हो गया था। लंबी तलाश के बाद रायपुर पुलिस ने 24 जून 2025 को उसे भोपाल से गिरफ्तार किया था।
पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे भी हुए थे। जांच में दावा किया गया कि केके श्रीवास्तव और उसके बेटे ने हवाला के जरिए करोड़ों रुपये चीन और ऑस्ट्रेलिया में निवेश किए। दोनों के बैंक खातों की जांच में करीब 441 करोड़ रुपये के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है।
मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टा ऐप महादेव बुक से जुड़ी मेस्टिजिक कंपनी में भी निवेश किया था। वहीं, दिल्ली के कारोबारी से ठगी गई रकम को 10 से 17 जुलाई के बीच अपने एक कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने के भी साक्ष्य जांच एजेंसियों को मिले हैं।
ईडी अब इस मामले में मनी ट्रेल, विदेशों में किए गए निवेश, हवाला नेटवर्क और अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



