लोकसभा में इतिहास रचेगा NDA! दो तिहाई आंकड़े की ओर तेजी से बढ़ रहा, अब तक कितने नंबर हुए

NDA Two Third Majority: दो साल पहले बहुमत के आंकड़े से पीछे रहने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए पिछले कुछ दिनों से लोकसभा से गुड न्यूज आ रही है। यहां एनडीए का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है और अब इतिहास रचने के करीब है। पहली बार एनडीए दो तिहाई के आंकड़े के पास पहुंचता दिख रहा है। एनडीए के नंबर्स पिछले महीने तब बढ़ने शुरू हुए, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 15 साल बाद हार का सामना करना पड़ा। हारते ही ममता की टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढहने लगी। पहले विधानसभा में 64 विधायक बागी हो गए तो फिर बारी आई लोकसभा और राज्यसभा की। राज्यसभा में कई सांसदों ने इस्तीफा दिया और फिर लोकसभा में 20 सांसदों ने काकोली घोष के नेतृत्व में बगावत का बिगुल फूंकते हुए नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने का ऐलान कर दिया। साथ ही, यह गुट लोकसभा में अलग बैठेगा और एनडीए को सपोर्ट करेगा।
टीएमसी के बाद अब उद्धव गुट में बड़ी टूट हुई है और दो तिहाई सांसद बागी हो गए हैं। इन्होंने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करके पत्र लिखा है कि अलग बैठने की व्यवस्था करवाई जाए। ये छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ विलय करके एनडीए में शामिल हो सकते हैं। इन छह सांसदों के एनडीए को सपोर्ट करने के बाद सत्ता पक्ष के गठबंधन का आंकड़ा और बढ़ गया है। उद्धव की पार्टी में यह पहली बार टूट नहीं है। आज से चार साल पहले भी इसी समय शिवसेना में टूट हुई थी और एकनाथ शिंदे कई विधायक और सांसद के साथ अलग हो गए थे। अब एक बार फिर से उद्धव की पार्टी में बड़ी टूट हो रही है।
दो साल पहले जीतीं 293 सीटें, अब बढ़ रहा आंकड़ा
दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 543 सदस्यीय लोकसभा में 362 सीटों के आसपास माना जाता है। एनडीए अभी इस आंकड़े से नीचे है, लेकिन सहयोगी दलों में लगातार इजाफा हो रहा है। दो साल पहले हुए 2024 लोकसभा चुनाव में NDA ने कुल 293 सीटें जीती थीं। हालांकि, चुनाव से पहले एनडीए का नारा अबकी बार 400 पार का था, लेकिन भाजपा को तब झटका लगा, जब वह महज 240 पर सिमट गई। एनडीए को बहुमत तो आया, लेकिन 293 सीटें ही हासिल हुईं। तब एनडीए के प्रमुख सहयोगियों में टीडीपी को 16 सीटें, जेडीयू को 12, शिवसेना को सात, एलजेपीआर को पांच सीटें शामिल थीं। सरकार बनाने के लिए जरूरी 272 के आंकड़े से 21 ज्यादा थीं, लेकिन दो तिहाई से काफी दूर आंकड़ा था।
दो तिहाई के नजदीक कैसे जा रहा NDA
अभी एनडीए के पास 293 सीटें हैं और इसमें हाल में ममता बनर्जी की टीएमसी में हुई टूट के बाद एनसीपीआई में हुई विलय के 20 सांसद जोड़ दें तो यह आंकड़ा बढ़कर 313 हो जाएगा। मॉनसून सत्र से ही एनसीपीआई एनडीए को सपोर्ट करेगा। इसके अलावा, छह सांसद उद्धव गुट की शिवसेना यूबीटी के बागी हो गए हैं। ये भी एनडीए को ही सपोर्ट करेंगे। इन्हें मिलाकर आंकड़ा 319 हो रहा है। लेकिन अब भी यह दो तिहाई के आंकड़े से काफी दूर है। ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे एनडीए यह आंकड़ा पा सकता है। इसके पीछे कुछ और दल हैं। दरअसल, बीते दिन यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और यूपी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अटकलों को हवा दे दी कि समाजवादी पार्टी के सांसद टूट सकते हैं। केशव प्रसाद मौर्य ने तो 25-26 सांसदों के आंकड़ा भी दे दिया। हालांकि, यह अभी बहुत शुरुआती बात है, लेकिन अगर जैसे टीएमसी और शिवसेना यूबीटी टूटी, वैसा कुछ सपा के साथ होता है तो एनडीए का आंकड़ा और बढ़ जाएगा। सपा के पास यूपी में 37 लोकसभा सांसद हैं। इसमें दो तिहाई का आंकड़ा 25 होता है। इसे मिला लें तो 345 के आसपास आंकड़ा पहुंच सकता है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं होने वाला, क्योंकि सपा का साफ कहना है कि उनकी पार्टी एकजुट है और मजबूत बनी है। वहीं, इसके बाद भी संख्या लगभग 17 से कम रह जाती है। एनडीए अभी इस संख्या से नीचे है, लेकिन यदि और सहयोगी दलों का विस्तार होता है, कुछ विपक्षी सांसद पाला बदलते हैं या छोटे दल गठबंधन का समर्थन करते हैं, तो यह दूरी और कम हो सकती है। हालांकि फिलहाल एनडीए के पास औपचारिक रूप से दो-तिहाई बहुमत नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ते समर्थन और विपक्षी खेमे में हो रही टूट-फूट के कारण राजनीतिक गलियारों में इस संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
इतिहास में कभी भी दो तिहाई तक नहीं पहुंचा एनडीए
अगर इस बार दो तिहाई का आंकड़ा हासिल होता है तो यह इतिहास में पहली बार होगा, जब एनडीए इस उपलब्धि को हासिल करेगा। एनडीए का अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन 2019 लोकसभा चुनाव में रहा था, जब उसने 353 सीटें जीती थीं। इसमें भाजपा को 303 सीटें मिली थीं और सहयोगी दलों के साथ एनडीए 353 के आंकड़े तक पहुंचा था। यह दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 362 सीटों से 9 सीट कम था। 2024 के चुनाव में एनडीए का आंकड़ा घटकर 293 सीटों पर आ गया। हालांकि, इस बार दो तिहाई के आंकड़े की चर्चा इसलिए ज्यादा हो रही है, क्योंकि अप्रैल महीने में सरकार परिसीमन संशोधन विधेयक लेकर आई थी, जो दो तिहाई नंबर न होने की वजह से पास नहीं हो सका था। सरकार का उद्देश्य इसे पास करवाना है। अगर यह पास होता है तो देशभर में लोकसभा में सीटें बढ़कर 850 हो जाएंगी, लेकिन इसके लिए दो तिहाई नंबर्स की जरूरत होगी। अब अगर सरकार यह आंकड़ा जोड़-तोड़कर हासिल कर लेती है तो इसे जल्द ही फिर से संसद में पेश किया जा सकता है।




