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8 फुट का दैत्य कनखजूरा! कभी धरती के जंगलों में चलता था इसका राज

नई दिल्ली। आज दिखाई देने वाले छोटे-छोटे कनखजूरे भले ही सामान्य लगते हों, लेकिन करोड़ों साल पहले धरती पर इनसे मिलता-जुलता एक ऐसा विशाल जीव मौजूद था, जिसकी लंबाई इंसान से भी ज्यादा थी। इसका नाम Arthropleura था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी के अब तक ज्ञात सबसे बड़े स्थलीय अकशेरुकी जीवों में शामिल था।

8 फुट तक पहुंचती थी लंबाई

Arthropleura कार्बोनिफेरस काल में पाया जाता था। जीवाश्मों के आधार पर इसकी लंबाई करीब 2 से 2.6 मीटर यानी लगभग 6.5 से 8.5 फुट तक होने का अनुमान है। इसका शरीर करीब 50 सेंटीमीटर तक चौड़ा और वजन लगभग 50 किलोग्राम तक रहा होगा।

यह आधुनिक कनखजूरे जैसा दिखता जरूर था, लेकिन आकार में उनसे कई गुना बड़ा था। इसके शरीर पर कई खंडों वाला कठोर कवच था और इसके बहुत सारे पैर थे।

जंगलों का शिकारी नहीं, सफाईकर्मी था

अपने डरावने आकार के बावजूद Arthropleura कोई खूंखार शिकारी नहीं था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह शाकाहारी जीव था और सड़ी हुई पत्तियां, पौधों के अवशेष तथा लकड़ी जैसी वनस्पतियों को खाता था।

इस लिहाज से इसे प्राचीन जंगलों का एक तरह का प्राकृतिक सफाईकर्मी कहा जा सकता है। यह धीरे-धीरे चलता था और इसके शरीर में शिकार करने वाले नुकीले दांत या हथियार जैसी संरचनाएं नहीं थीं।

आखिर इतना बड़ा क्यों था?

Arthropleura के विशाल आकार के पीछे उस समय का वातावरण भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। कार्बोनिफेरस काल में पृथ्वी पर घने और विशाल जंगल मौजूद थे। उस दौर में वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर आज की तुलना में काफी अधिक था।

उच्च ऑक्सीजन स्तर ने उस समय कई कीटों और अन्य अकशेरुकी जीवों को बड़े आकार तक पहुंचने में मदद की। इसी दौर में Arthropleura जैसे विशाल जीव अस्तित्व में आए।

करोड़ों साल बाद मिले इसके जीवाश्म

Arthropleura के जीवाश्म स्कॉटलैंड समेत कई स्थानों पर मिले हैं। उत्तरी इंग्लैंड में मिले एक बड़े जीवाश्म ने वैज्ञानिकों को इस प्राचीन जीव के आकार का बेहतर अनुमान लगाने में मदद की। शोध के आधार पर एक नमूने की लंबाई करीब 2.63 मीटर आंकी गई।

कैसे खत्म हो गया 8 फुट का यह दैत्य?

समय के साथ पृथ्वी की जलवायु और पर्यावरण में बड़े बदलाव हुए। पर्मियन काल की शुरुआत में वातावरण अपेक्षाकृत शुष्क होने लगा और विशाल जंगलों का क्षेत्र कम होता गया। ऑक्सीजन के स्तर में भी गिरावट आई।

बदलते पर्यावरण, भोजन की उपलब्धता में बदलाव और नए जीवों के आने के कारण Arthropleura जैसे विशाल जीवों के लिए परिस्थितियां मुश्किल होती गईं। आखिरकार यह प्राचीन दैत्य धरती से विलुप्त हो गया।

यानी डायनासोरों के धरती पर आने से भी पहले एक ऐसा दौर था, जब जंगलों में 8 फुट लंबा विशाल मिलीपेड घूमता था—दिखने में डरावना, लेकिन असल में पूरी तरह शाकाहारी!

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