बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेंगी चार जरूरी दवाएं! केंद्र सरकार ने नियम सख्त करने की तैयारी की

नई दिल्ली। देश में बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का इस्तेमाल रोकने और दवाओं की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चार दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची एच1 (Schedule H1) में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन, गैबापेंटिन और कैरिसोप्रोडोल शामिल हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य इन दवाओं की बिक्री और वितरण पर कड़ी निगरानी रखना है।
इन चार दवाओं की बिक्री पर बढ़ेगी निगरानी
प्रस्तावित बदलाव के बाद इन दवाओं को सामान्य रूप से मेडिकल स्टोर से खरीदना आसान नहीं होगा। इन्हें डॉक्टर की वैध पर्ची के आधार पर ही बेचा जा सकेगा। दवा विक्रेताओं को बिक्री का निर्धारित रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें डॉक्टर का नाम, मरीज की जानकारी, दवा की मात्रा और बिक्री का विवरण दर्ज करना होगा।
केंद्र सरकार ने 19 अगस्त 2026 को इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी की थी। अंतिम नियम अधिसूचित होने के बाद प्रस्तावित बदलाव लागू होने की प्रक्रिया शुरू होगी। मसौदे में अंतिम अधिसूचना के प्रकाशन के 180 दिन बाद नियम प्रभावी होने का प्रावधान रखा गया है।
कौन सी दवा किस बीमारी में आती है काम?
1. फ्लूपेंरिक्सोल: यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा है। इसका उपयोग कुछ मानसिक विकारों के इलाज में किया जाता है।
2. जोपिक्लोन: नींद न आने की गंभीर समस्या में डॉक्टर इस दवा को सीमित अवधि के लिए देते हैं। इसका गलत इस्तेमाल निर्भरता और अन्य दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।
3. गैबापेंटिन: यह दवा मुख्य रूप से मिर्गी और नसों से संबंधित दर्द के उपचार में इस्तेमाल की जाती है। कुछ मरीजों में इसका उपयोग अन्य चिकित्सकीय स्थितियों में भी किया जाता है।
4. कैरिसोप्रोडोल: यह मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली मांसपेशी शिथिलक दवा है। इसका उपयोग सामान्यतः सीमित अवधि के लिए किया जाता है।
गलत इस्तेमाल रोकना है मुख्य उद्देश्य
विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं का बिना चिकित्सकीय निगरानी के सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल से नशे, निर्भरता और गंभीर दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। इसी चिंता को देखते हुए दवा नियामक संस्थाओं ने इनके नियंत्रण को और मजबूत करने की सिफारिश की है।
मेडिकल स्टोर संचालकों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
अनुसूची एच1 में शामिल दवाओं की बिक्री के लिए सामान्य पर्ची व्यवस्था की तुलना में अधिक कड़े रिकॉर्ड संबंधी नियम लागू होते हैं। दवा दुकानदारों को बिक्री का अलग रिकॉर्ड रखना और नियमानुसार उसका संरक्षण करना होता है। इससे दवाओं की खरीद-बिक्री की निगरानी करना और अनधिकृत बिक्री पर कार्रवाई करना आसान होगा।
मरीजों के लिए क्या है जरूरी?
इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि इन दवाओं का चिकित्सकीय उपयोग बंद हो जाएगा। जिन मरीजों को डॉक्टर ने इन दवाओं की सलाह दी है, उन्हें निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत दवा मिलती रहेगी। हालांकि मरीजों को स्वयं दवा शुरू करने, बिना सलाह खुराक बढ़ाने या लंबे समय तक सेवन करने से बचना चाहिए।
केंद्र सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना, मेडिकल स्टोर की जवाबदेही तय करना और बिना पर्ची दवा खरीदने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण लगाना है। इससे मरीजों की सुरक्षा के साथ दवा वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।




