
पूरे प्रदेश में छत्तीसगढ़ बोर्ड ( कक्षा दसवीं एवं बारहवीं ) के ख़राब नतीजों को लेकर प्रशासन / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्यों पर कार्रवाई की जा रही है. अलग-अलग जिलों में प्रशासन द्वारा जिन स्कूलों के नतीजे खराब है उन प्राचार्य के ट्रांसफर / कार्यवाही की सूचना है .

बोर्ड परीक्षाओं में मन मुताबिक नतीजे ना आने पर कार्रवाई से जमीनी स्तर पर गरीब विद्यार्थियों को पढ़ाई से वंचित किया जा रहा है .
इस तरह की कार्रवाई से जो दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं :-
1 ) कम अंक हासिल किये हुए विद्यार्थियों को किसी भी सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं मिल रहा है. सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों को पूर्व कक्षाओं के नतीजे के आधार पर प्रवेश दिया जा रहा. कम अंक वाले विद्यार्थियों को वापस लौटाया जा रहा है . यह नियमों के विरुद्ध है तथा गरीब विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित करना संविधान के खिलाफ भी है .
2 ) अच्छे नतीजे के दबाव में सभी स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं पारदर्शी नहीं हो रहीं हैं . कार्यवाही के भय से सरकारी स्कूलों में नक़ल की शिकायत आम है . इस तरह की पढ़ाई और परीक्षा से नतीजे भले मन मुताबिक आ जाएँ लेकिन शिक्षा के उद्देश प्रभावित हो रहे हैं .
उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित तब किया जा रहा है जब प्रदेश में सभी जगह स्कूल शिक्षा विभाग की ड्रॉप आउट बढ़ने को लेकर बैठक चल रही है और ड्राप आउट को कम करने का प्रयास हो रहा है.
सरकारी स्कूल में पढाई के इच्छुक प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश मिले ये सुनिश्चित किया जाये .




