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फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग करते समय रहें सावधान, एक गलती से खाली हो सकता है बैंक खाता; फर्जी वेबसाइटों से ऐसे बचें

त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों से लेकर ऑनलाइन खरीदारी के मंचों तक रौनक बढ़ जाती है। करवा चौथ, दिवाली और दूसरे त्योहारों के लिए लोग कपड़े, जूते, गहने, मेकअप और घर की सजावट का सामान खरीदते हैं। इस दौरान कई कंपनियां आकर्षक छूट और विशेष सेल भी चलाती हैं। कम कीमत पर पसंदीदा सामान खरीदने का मौका देखकर ग्राहक तेजी से ऑर्डर करते हैं। लेकिन इसी बढ़ती खरीदारी के बीच साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ सकता है।

ठग कई बार मशहूर कंपनियों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट और फर्जी विज्ञापनों का इस्तेमाल करते हैं। इन पर मिलने वाले भारी डिस्काउंट के लालच में ग्राहक अपनी बैंकिंग जानकारी साझा कर सकते हैं या ऐसे सामान के लिए भुगतान कर सकते हैं जो कभी पहुंचता ही नहीं। इसलिए त्योहारों की खरीदारी करते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि वेबसाइट की विश्वसनीयता और भुगतान की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

अनजान लिंक से खरीदारी करना पड़ सकता है महंगा

त्योहारी सीजन में सोशल मीडिया, संदेशों और ईमेल के जरिए कई तरह के ऑफर सामने आते हैं। इनमें कभी-कभी किसी महंगे ब्रांड का सामान बेहद कम कीमत पर देने का दावा किया जाता है। ऐसे विज्ञापनों के पीछे मौजूद लिंक आपको किसी नकली वेबसाइट पर ले जा सकता है।

इन वेबसाइटों का नाम, लोगो और डिजाइन असली कंपनी से मिलता-जुलता हो सकता है। ग्राहक को शुरुआत में अंतर समझ नहीं आता और वह भुगतान कर देता है। इसके बाद या तो सामान की डिलीवरी नहीं होती, नकली या खराब उत्पाद मिलता है अथवा भुगतान और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पैदा हो जाता है।

इससे बचने के लिए सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप खोलकर ऑफर की जांच करें। किसी भी आकर्षक विज्ञापन को सही मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें।

ऑनलाइन सामान खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

त्योहारों की खरीदारी के दौरान कुछ छोटी सावधानियां आपको आर्थिक नुकसान से बचा सकती हैं।

  • वेबसाइट का पता जांचें: वेबसाइट के नाम और इंटरनेट पते को ध्यान से पढ़ें। असली ब्रांड से मिलता-जुलता नाम होने का मतलब यह नहीं कि वेबसाइट भरोसेमंद है।
  • विक्रेता की जानकारी देखें: सामान बेचने वाले विक्रेता का विवरण, ग्राहक समीक्षाएं और उसकी रेटिंग जांचें। केवल अच्छी रेटिंग देखकर तुरंत भरोसा न करें।
  • बहुत सस्ते ऑफर से सावधान रहें: यदि किसी ब्रांडेड उत्पाद की कीमत अन्य जगहों की तुलना में असामान्य रूप से कम है, तो खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें।
  • वापसी की शर्तें पढ़ें: सामान खराब निकलने या पसंद न आने पर उसे लौटाने और पैसे वापस मिलने की शर्तें पहले समझ लें।
  • संपर्क विवरण जांचें: वेबसाइट पर उपलब्ध ग्राहक सेवा की जानकारी, कंपनी का विवरण और शिकायत दर्ज कराने का तरीका देखें।
  • सुरक्षित भुगतान विकल्प चुनें: भुगतान करने से पहले राशि और प्राप्तकर्ता की जानकारी जांचें। अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी दूसरे खाते में पैसे न भेजें।

ऑनलाइन भुगतान करते समय न करें ये गलतियां

ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भुगतान सबसे संवेदनशील चरण होता है। ठग कई बार ग्राहक को नकली भुगतान पन्ने पर ले जाते हैं या बैंक और ग्राहक सेवा अधिकारी बनकर गोपनीय जानकारी मांगते हैं।

इसलिए अपना एकमुश्त पासवर्ड यानी ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन और कार्ड की गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। बैंक या भुगतान सेवा का प्रतिनिधि बनकर संपर्क करने वाला व्यक्ति भी यदि ये जानकारियां मांगता है, तो सावधान रहें।

याद रखें कि यूपीआई पिन का इस्तेमाल भुगतान अधिकृत करने के लिए होता है। पैसे प्राप्त करने के लिए सामान्यतः यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन साझा करने वाले ऐप या दूर से आपके फोन को नियंत्रित करने वाले ऐप भी इंस्टॉल न करें।

यदि भुगतान के दौरान वेबसाइट संदिग्ध लगे, तो लेनदेन रोक दें। केवल सुरक्षित भुगतान पन्ने का दिखना भी किसी विक्रेता के वास्तविक होने की पूरी गारंटी नहीं है।

सामान नहीं पहुंचा या नकली उत्पाद मिला तो क्या करें?

ऑनलाइन खरीदारी के बाद सामान नहीं पहुंचने, गलत उत्पाद मिलने या विक्रेता के जवाब नहीं देने पर सबसे पहले संबंधित खरीदारी मंच या कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सेवा माध्यम से शिकायत करें। ऑर्डर का विवरण, भुगतान की रसीद, संदेश और विक्रेता के साथ हुई बातचीत सुरक्षित रखें।

यदि आपके बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन हुआ है या आपको वित्तीय साइबर ठगी का संदेह है, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचित करें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, भारत सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

शिकायत जितनी जल्दी दर्ज की जाएगी, संबंधित संस्थाओं को लेनदेन का पता लगाने और संभावित नुकसान रोकने के लिए कार्रवाई शुरू करने का उतना ही जल्दी अवसर मिलेगा। हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

त्योहारों की खरीदारी में समझदारी ही सबसे बड़ा बचाव

फेस्टिव सीजन में छूट और विशेष ऑफर का फायदा उठाना गलत नहीं है, लेकिन जल्दबाजी में खरीदारी करना नुकसानदेह हो सकता है। किसी भी वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले उसका पता, विक्रेता की जानकारी, उत्पाद की कीमत और भुगतान की शर्तें जांचें।

याद रखें, असली खरीदारी मंच पर भी किसी तीसरे पक्ष के विक्रेता की विश्वसनीयता अलग से जांचना जरूरी हो सकता है। इसलिए आकर्षक छूट के बजाय सुरक्षित खरीदारी को प्राथमिकता दें। थोड़ी-सी सावधानी आपके पैसों और निजी जानकारी को ऑनलाइन ठगी से बचाने में मदद कर सकती है।

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