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विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर रायपुर में जागरूकता अभियान, CPR प्रशिक्षण से लेकर वॉकाथॉन तक हुए आयोजन

रायपुर । विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के एनेस्थीसियोलॉजी एवं पेन मेडिसिन विभाग की ओर से जनजागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. जया ललवानी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए आम नागरिकों को जीवनरक्षक कौशलों की जानकारी दी गई और सुरक्षित शल्य चिकित्सा में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह रायपुर रेलवे स्टेशन पर पंचरक्षक अभियान के तहत जीवनरक्षक कौशलों के लाइव प्रदर्शन से हुई। सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक आयोजित इस गतिविधि में विशेषज्ञों ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की तकनीक का प्रदर्शन किया। यात्रियों और आम नागरिकों ने हैंड्स-ऑन अभ्यास में हिस्सा लेकर आपातकालीन स्थिति में सीपीआर देने की बुनियादी जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद चिकित्सा महाविद्यालय से नगर घड़ी चौक तक जागरूकता वॉकाथॉन निकाली गई। इसमें इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट (ISA) की स्टेट और सिटी ब्रांच के पदाधिकारियों सहित चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वॉकाथॉन के माध्यम से लोगों को बताया गया कि एनेस्थीसिया केवल ऑपरेशन के दौरान बेहोशी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीज की सुरक्षा, दर्द नियंत्रण और बेहतर उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में स्नातक विद्यार्थियों के लिए पंचरक्षक थीम पर पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसकी थीम ‘बिफोर, ड्यूरिंग एंड बियॉन्ड सर्जरी’ रखी गई, जिसमें विद्यार्थियों ने सर्जरी से पहले, ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद मरीज की सुरक्षा में एनेस्थीसिया की भूमिका को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।

पंचरक्षक अभियान के तहत पांच प्रमुख जीवनरक्षक कौशलों पर विशेष जोर दिया गया। इनमें सीपीआर, गले में वस्तु फंसने पर चोकिंग प्रबंधन, बेहोशी की स्थिति में प्राथमिक सहायता, चोट एवं रक्तस्राव नियंत्रण तथा आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर गोल्डन ऑवर में उपचार सुनिश्चित करना शामिल रहा। इन विषयों पर आधारित प्रतियोगिता में पांच-पांच विद्यार्थियों के समूह बनाए गए, ताकि उनमें व्यावहारिक दक्षता, टीम भावना और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सके।

आयोजन में चिकित्सा महाविद्यालय के प्रभारी डीन डॉ. एस. बी. एस. नेताम सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं चिकित्सक उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों और जनजागरूकता के प्रयासों की सराहना की।

विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर आयोजित इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य जीवनरक्षक तकनीकों को आमजन तक पहुंचाना और सुरक्षित शल्य चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि आपातकालीन स्थिति में समय पर दी गई प्राथमिक सहायता किसी की जान बचा सकती है, वहीं सुरक्षित एनेस्थीसिया सफल शल्य चिकित्सा और मरीज की सुरक्षा का अहम आधार है।

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