
रायपुर . विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमंत्रित किया गया है। बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उनसे सौजन्य मुलाकात कर पर्व में शामिल होने का न्योता दिया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप मुख्यमंत्री को पागा पहनाकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार जताते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा क्षेत्र की प्राचीन आस्था, जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता की विशिष्ट मिसाल भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जताई।
75 दिनों तक चलने वाला अनूठा पर्व
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा के इतिहास, धार्मिक अनुष्ठानों और इस वर्ष की तैयारियों की जानकारी दी। करीब 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है। इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ इसकी शुरुआत हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा।
बस्तर दशहरा की खासियत यह है कि इसे भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की उपासना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है। इसमें धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्थानीय जनजातीय समुदायों की परंपराओं और सामूहिक भागीदारी का विशेष महत्व है।
रथयात्रा और जनजातीय परंपराएं हैं प्रमुख आकर्षण
बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा को चालुक्य शासक पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार, पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा के बाद उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई थी। इसी परंपरा से बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।
पर्व के दौरान मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों के लोग अपनी परंपरागत जिम्मेदारियां निभाते हैं। रथ निर्माण से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजन की व्यवस्थाओं तक स्थानीय समाज की भागीदारी इस पर्व को विशिष्ट बनाती है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को दर्शाती है।
संस्कृति और पर्यटन को मिलती है पहचान
बस्तर दशहरा की भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-विधान और जीवंत लोक संस्कृति हर वर्ष श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। यह आयोजन न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाता है, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं और पर्यटन को भी व्यापक पहचान दिलाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। ऐसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं। इनका संरक्षण करना और इन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सांसद महेश कश्यप के साथ मंगलु मांझी, बलराम मांझी, पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित बस्तर दशहरा समिति के अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।




