
सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी करेंगे। अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल होंगे।
15 राज्यों के सचिव और 14 राज्यों के पंजीयक होंगे शामिल
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बताया कि सम्मेलन में 15 राज्यों के सहकारिता सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भाग लेंगे। सम्मेलन में एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, समितियों के कंप्यूटरीकरण, डिजिटल तकनीक, भंडारण क्षमता बढ़ाने और सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी।
इसके अलावा एम-पैक्स के माध्यम से उर्वरक वितरण, बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं से जुड़ाव और आगामी तीन महीनों की कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार किया जाएगा।
सहकारिता को डिजिटल और आधुनिक बनाने पर जोर
सम्मेलन के पहले दिन सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। विभिन्न राज्य एम-पैक्स और दुग्ध समितियों के गठन, सदस्यता विस्तार, डिजिटल सेवाओं और किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के अपने अनुभव साझा करेंगे।
विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना, सहकारी समितियों के कारोबार में विविधता लाने तथा प्राथमिक समितियों को राष्ट्रीय निर्यात, जैविक और बीज सहकारी संस्थाओं से जोड़ने जैसे विषयों पर भी मंथन होगा।
दूसरे दिन नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम आगामी पांच वर्षों के वित्तीय सहयोग और राज्यवार लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन में अधिकारी बस्तर की एम-पैक्स, लघु वनोपज और जनजातीय सहकारी समितियों का भी भ्रमण करेंगे।
छत्तीसगढ़ में सैकड़ों नई सहकारी समितियों का गठन
डॉ. प्रसन्ना के अनुसार ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में 515 नए एम-पैक्स, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की गई हैं।
‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए किसानों के खाते खोले गए हैं। एम-पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। राज्य के 2,058 एम-पैक्स में उपलब्ध माइक्रो एटीएम के जरिए अब तक 324 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन किए जा चुके हैं।
भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए गोदाम निर्माण
राज्य में एम-पैक्स के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जा रहे हैं। आरआईडीएफ योजना के तहत 725 एम-पैक्स में गोदामों का निर्माण किया गया है। वहीं 2025 में गोदाम विहीन अथवा जर्जर गोदाम वाले 100 एम-पैक्स के लिए नए गोदामों की योजना स्वीकृत की गई है। नवगठित 515 एम-पैक्स में भी गोदाम निर्माण प्रस्तावित है।
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के तहत राज्य के 46 एम-पैक्स का चयन किया गया है। इनमें 20 के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है, नौ को एएमआई सब्सिडी मिल चुकी है और छह एम-पैक्स में निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से बढ़ा जुड़ाव
राज्य शासन ने कृषि उपज उपार्जन के लिए एनसीसीएफ को 14 और नाफेड को 15 जिलों में एजेंसी नियुक्त किया है। एनसीसीएफ में राज्य के 2,058 और नाफेड में 412 एम-पैक्स पंजीकृत हैं।
इसके अलावा 1,681 एम-पैक्स राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, 1,633 राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और 1,746 भारतीय बीज सहकारी समिति से जुड़ चुके हैं।
एथेनॉल संयंत्रों से किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ
कोंडागांव में 80 केएलपीडी क्षमता के एथेनॉल संयंत्र में स्थानीय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किया जा रहा है, जिससे किसानों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
भोरमदेव में पीपीपी मॉडल पर संचालित 80 केएलपीडी एथेनॉल संयंत्र सहकारी शक्कर कारखाने के लिए आय का नियमित स्रोत बन रहा है। पंडरिया, अंबिकापुर और बालोद में तीन अन्य एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के इन अनुभवों और उपलब्धियों को साझा करते हुए सहकारी समितियों की पहुंच, डिजिटल सेवाओं, कारोबार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।




