
रायपुर। छत्तीसगढ़ में संस्कृत शिक्षा को और प्रभावी बनाने तथा विद्यार्थियों के हित में नई योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने को लेकर छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डल, रायपुर में प्राच्य संस्कृत विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रधानाचार्यों की बैठक आयोजित की गई। 5 अक्टूबर को हुई इस बैठक में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के साथ विद्यालयों की भूमिका को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता विद्यामण्डलम् के अध्यक्ष राजेश कुमार राजपूत ने की। उन्होंने विद्यालय प्रमुखों से विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सक्रियता से काम करने का आह्वान किया। साथ ही संस्कृत शिक्षा को समाज के अधिक से अधिक लोगों से जोड़ने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
संस्कृत को जनभागीदारी से जोड़ने पर चर्चा
बैठक में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने कहा कि संस्कृत विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में संस्कृत की उपयोगिता और महत्व को भी प्रभावी ढंग से सामने लाएं।
विद्यालयों की गतिविधियों में जनभागीदारी बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।
जिम्मेदारियों के बेहतर निर्वहन की अपील
विद्यामण्डलम् की सदस्य सुमन मुथा ने विद्यालयों के प्राचार्यों और प्रधानाचार्यों से अपने दायित्वों का निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने छात्रहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।
वहीं सचिव डॉ. विजय खंडेलवाल ने बैठक में विभिन्न प्रशासनिक विषयों से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा की और विद्यालय प्रमुखों को मार्गदर्शन दिया।
गणवेश, किताब और साइकिल वितरण की जानकारी
सहायक संचालक वित्त एवं योजना अमित शुक्ला ने विद्यार्थियों के लिए संचालित सुविधाओं और वितरण योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने गणवेश, पाठ्यपुस्तक, साइकिल और कंप्यूटर वितरण से संबंधित प्रक्रियाओं और आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की।
सहायक संचालक परीक्षा डॉ. गरिमा ताम्रकार ने विद्यार्थियों के नामांकन तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया।
अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
बैठक में व्याख्याता नत्रता चन्द्राकर, डॉ. व्यासनारायण आर्य, सहायक लेखाधिकारी ए.पी. मिश्रा और सहायक ग्रेड-2 वाय.के. चौबे सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान छात्रहित से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और संस्कृत शिक्षा के विस्तार को लेकर विभिन्न सुझावों पर भी विचार किया गया।


