23 महीने के वेदांश के इलाज की उम्मीद बढ़ी, अनंत अंबानी ने पूरी मदद का दिया भरोसा

मुंबई के 23 महीने के वेदांश सिंह स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं। उनके इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की जरूरत है। लंबे समय से फंड जुटाने में लगी टीम को अब बड़ी राहत की उम्मीद जगी है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मयूरेश गुर्जर के मुताबिक, अनंत अंबानी ने वेदांश के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भरोसा दिया है। गुर्जर और उनकी टीम कई दिनों से बच्चे के इलाज के लिए लोगों से आर्थिक मदद जुटा रही थी। इस अभियान के जरिए अब तक करीब 2.22 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके थे।
लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान हुई मुलाकात
मयूरेश गुर्जर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर बताया कि 21 सितंबर को उनकी टीम मुंबई में लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंची थी। इसी दौरान अनंत अंबानी की नजर टीम के बैनर पर पड़ी। उन्होंने अपनी कार रुकवाई और टीम के सदस्यों से करीब पांच मिनट तक बातचीत की।
इस दौरान उन्हें वेदांश की बीमारी, उसकी मौजूदा स्थिति और इलाज में आने वाले खर्च के बारे में जानकारी दी गई। गुर्जर के अनुसार, बातचीत के दौरान अनंत अंबानी ने बच्चे की मदद करने की बात कही।
‘इलाज में जितना खर्च आएगा, मैं उठाऊंगा’
गुर्जर के मुताबिक, अनंत अंबानी ने भरोसा दिलाया कि वेदांश के इलाज में जितना भी खर्च आएगा, वह उसे उठाएंगे। उन्होंने वेदांश को अपने अस्पताल लाने के लिए भी कहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के फोन नंबर भी साझा किए।
गुर्जर ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि वेदांश के लिए चलाया जा रहा मिशन अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है।
टीम को आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, गुर्जर ने यह भी बताया कि अनंत अंबानी की टीम की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि और आगे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिलना बाकी है। टीम को उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में संपर्क किया जाएगा।
वेदांश की उम्र अब 23 महीने हो चुकी है। ऐसे में उसके परिवार और अभियान से जुड़े लोगों के लिए इलाज की प्रक्रिया जल्द शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है।
‘हम खुशी से कांप रहे थे’
मदद का भरोसा मिलने के बाद मयूरेश गुर्जर ने अपनी टीम की भावनाएं साझा करते हुए कहा कि कई दिनों की मेहनत, जागी हुई रातें और मुश्किल परिस्थितियों के बीच चलाया गया अभियान अब उम्मीद में बदल गया है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।



