क्या आपको पता है कि प्रधानमंत्री की एक विदेश यात्रा का खर्चा कैसे तय होता है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 6 दिनों की विदेश यात्रा पर रवाना हो चुके हैं. वे 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रहेंगे. जब भी प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाते हैं, तो लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि इन वीआईपी दौरों का खर्च कौन उठाता है और इसमें कितने रुपये खर्च होते हैं.
विदेश मंत्रालय उठाता है वित्तीय जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का पूरा खर्च मुख्य रूप से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा उठाया जाता है. जब भी प्रधानमंत्री किसी वैश्विक सम्मेलन या द्विपक्षीय बातचीत के लिए विदेश जाते हैं, तो उनके सफर की हर तैयारी का बजट मंत्रालय की ओर से ही आवंटित किया जाता है. हालांकि, कूटनीतिक परंपरा के अनुसार जिस देश में प्रधानमंत्री जाते हैं, वहां की मेजबान सरकार भी उनके रहने और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सुविधाओं का खर्च उठाती है. इससे भारतीय सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कुछ कम हो जाता है.
खर्चे का हिसाब कैसे तय होता है
प्रधानमंत्री की यात्रा का खर्च कई चीजों पर निर्भर करता है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उनके विशेष चार्टर्ड विमान, विशेष सुरक्षा टीम, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल और अन्य जरूरी उपकरणों के परिवहन पर खर्च होता है. चूंकि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उनके साथ जाने वाले अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था में बड़ी राशि का इस्तेमाल होता है. हर यात्रा का कुल खर्चा इस बात पर निर्भर करता है कि वह देश भारत से कितनी दूर है, यात्रा कितने दिनों की है और साथ जाने वाले डेलिगेशन में कितने लोग शामिल हैं. इसीलिए हर विदेश दौरे का बजट अलग-अलग होता है.




