देश

अचानक पैरों में लकवा क्यों मार सकता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण

हमारे शरीर में पैरों की ताकत अचानक खत्म हो जाना या एकदम से चलने-फिरने में समस्या होना एक ऐसी स्थिति है, जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार लोग इसे थकान, नस दबने या कुछ समय की कमजोरी समझकर घर पर आराम करने लगते हैं, लेकिन यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के मुताबिक यह लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। यदि समय रहते इसका सही कारण पता न लगाया जाए और इलाज शुरू न किया जाए, तो यह स्थायी विकलांगता तक का कारण बन सकता है। इसलिए पैरों में अचानक लकवा या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

अचानक पैरों में लकवा क्यों मार सकता है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, पैरों में अचानक लकवा आने का मतलब हमेशा स्ट्रोक नहीं होता। इसके पीछे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड, नसों या मांसपेशियों से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सही कारण का पता केवल डॉक्टर की जांच और जरूरी टेस्ट के बाद ही लगाया जा सकता है। इसलिए घर पर इंतजार करने या घरेलू उपाय अपनाने की बजाय तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।

  • डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि कई गंभीर बीमारियां अचानक पैरों की ताकत खत्म कर सकती हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण स्ट्रोक है, जिसमें मस्तिष्क तक ब्लड फ्लो प्रभावित हो जाता है।
  • इसके अलावा स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगना, रीढ़ की नसों पर दबाव पड़ना, स्लिप डिस्क के कारण स्पाइनल कॉर्ड का दब जाना, गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome), नसों से जुड़ी बीमारियां और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकार भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
  • शरीर में पोटैशियम की ज्यादा कमी जैसे गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी अचानक पैरों को कमजोर बना सकता है। कुछ मामलों में स्पाइनल इंफेक्शन, रीढ़ में ब्लीडिंग या अन्य इंफेक्शन भी इस समस्या की वजह बनते हैं।
लकवा की पहचान कैसे होती है और इलाज?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि पैरों में अचानक लकवा आने का वास्तविक कारण जानने के लिए न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है। इसके साथ जरूरत के अनुसार एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan), ब्लड टेस्ट और अन्य जांचें कराई जाती हैं। इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या किस वजह से हुई है। यदि स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव है, तो इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। वहीं गिलियन-बैरे सिंड्रोम जैसी स्थितियों में इम्यूनोथेरेपी और दवाओं से उपचार किया जाता है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने पर उसे तुरंत ठीक किया जाता है, जबकि कई मरीजों को रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी की भी जरूरत पड़ती है।

निष्कर्ष

पैरों में अचानक लकवा या गंभीर कमजोरी कभी भी सामान्य समस्या नहीं मानी जानी चाहिए। यह शरीर का ऐसा संकेत है जो किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी की ओर इशारा कर सकता है। डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचना, सही जांच कराना और कारण के अनुसार तुरंत इलाज शुरू करना ही मरीज को स्थायी नुकसान और विकलांगता से बचा सकता है। इसलिए यदि पैरों की ताकत अचानक खत्म होने लगे, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Related Articles

Back to top button