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नक्सल हिंसा के पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर, बस्तर के सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा केंद्र

अमित शाह ने दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल को बताया महत्वपूर्ण, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विकास कार्यों को गति देने की प्रतिबद्धता दोहराई

रायपुर । नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर शुरू हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। शिविर के जरिए दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा ने बस्तर के अनेक परिवारों को लंबे समय तक पीड़ा दी है। अब प्रभावित लोगों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने के अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिव्यांगजनों को दैनिक गतिविधियों में सहूलियत देने के साथ आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करेंगे।

768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे सहायक उपकरण

15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं की मदद से किया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचाए जाने की जानकारी दी गई। सरकार का उद्देश्य नक्सली हिंसा के कारण दिव्यांग हुए लोगों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को अधिक सुगम बनाना है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास के प्रयास

अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को बैंक खाते, आर्थिक सहायता, रोजगार, आवास और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने संबंधी आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके लिए आजीविका के अवसर तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में खेल, संस्कृति और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से लोगों को नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सहायता देने और बस्तर में शांति एवं विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

बस्तर में विकास को गति देने के लिए 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई। इन केंद्रों के जरिए स्थानीय लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने, कौशल प्रशिक्षण देने और रोजगार एवं स्वरोजगार की गतिविधियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा और शांति के बाद अब बस्तर में विकास को तेज करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने नेतानार में शुरू किए गए सेवा डेरा का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण के साथ इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

कृषि और पशुपालन से आय बढ़ाने पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने बस्तर में कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी। इन परियोजनाओं से लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि सिंचाई के विस्तार से कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण दिव्यांग हुए लोगों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर मिलने चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान कुछ लाभार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कृत्रिम पैर और ट्राइसाइकिल मिलने से उन्हें आवागमन तथा दैनिक कार्यों में सुविधा मिलने की उम्मीद जताई गई।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने और पुनर्वास के प्रयास जारी रखने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बस्तर के विकास, दिव्यांगजनों की सहायता और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। सरकार का लक्ष्य शांति के वातावरण में बस्तर के गांवों तक विकास सुविधाएं पहुंचाना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाना है।

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