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छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर: नदी-नाले उफान पर, कई रास्ते बंद; गंगरेल समेत प्रमुख जलाशयों से छोड़ा जा रहा पानी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। वहीं प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, 25 सितंबर 2026 की स्थिति में गरियाबंद जिले के सिकासार जलाशय में 198.82 मिलियन घन मीटर की कुल क्षमता के मुकाबले 179.28 मिलियन घन मीटर पानी जमा है। जलाशय का जलस्तर 1330 फीट दर्ज किया गया है, जो करीब 89.32 प्रतिशत जलभराव है।

पानी की लगातार बढ़ती आवक को देखते हुए सिकासार जलाशय के 12 गेट खोले गए हैं। प्रत्येक गेट को 3 फीट तक खोला गया है और करीब 20 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं जलाशय में करीब 34 हजार क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है।

गंगरेल में 99 फीसदी से ज्यादा जलभराव

महासमुंद, धमतरी और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का असर प्रमुख जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। गंगरेल जलाशय में 99.01 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है और वहां से करीब 1.22 लाख क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है।

इसी तरह मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत भर चुका है। यहां से 7,558 क्यूसेक पानी गंगरेल की ओर छोड़ा जा रहा है। दुधावा जलाशय में 97.36 प्रतिशत जलभराव है और वहां से 16,762 क्यूसेक पानी गंगरेल/महानदी की ओर छोड़ा जा रहा है।

वहीं सोंढूर जलाशय में 89.42 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। यहां से 42,570 क्यूसेक पानी पैरी और महानदी नदी तंत्र की ओर छोड़ा जा रहा है।

लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा जलस्तर एवं जल प्रवाह की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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