खैर तस्करी का नेटवर्क क्या पुलिस ने पूरी तरह ख़त्म कर दिया- पलविंदर सिंग पन्नू, प्रदेश अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट विंग, आप
छग में परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन, जीएसटी डिपार्मेंट और वन विभाग की चार प्रकार की चेकिंग आज भी घूसखोरी को अंजाम दे रही है-पलविंदर सिंग पन्नू, प्रदेश अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट विंग, आप

रायपुर। आम आदमी पार्टी के ट्रांसपोर्ट विंग प्रदेश अध्यक्ष पलविंदर सिंग पन्नू ने आरोप लगाया है कि खैर तस्करी केवल लकड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि 12 मार्च 2021 को रायपुर के मंदिरहसौद क्षेत्र में करीब 2 करोड़ रुपये, 3 जुलाई 2024 को बलरामपुर-रामानुजगंज के सुंदरपुर जंगल में करीब 200 नग, ग्राम बिशुनपुर से भी 42 नग,अक्टूबर 2025 में रायगढ़ में खैर और तेंदू की अवैध लकड़ी से भरा ट्रक और स्कॉर्पियो ,16 फरवरी 2026 को रायगढ़ वन विभाग ने अंतरराज्यीय खैर तस्करी के गिरोह पकड़ाया,चांपा के अकलतरी-भांटा क्षेत्र स्थित गुप्त गोदाम से बड़ी मात्रा में खैर बरामद की गयी जिसे पंजाब और हरियाणा भेजा जाना था,14 जुलाई 2026 को रायपुर में दो ट्रकों से खैर की लकड़ी जब्त की गई, जिसे हरियाणा भेजे जाने की तैयारी की जा रही थी।
*लकड़ी तस्करी के साथ अवैध शराब के नेटवर्क का भी आरोप*
पन्नू ने कहा कि खैर तस्करी में शामिल लोगों का नेटवर्क कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके अनुसार छत्तीसगढ़ के जंगलों से लकड़ी दूसरे राज्यों में भेजने के बाद उन्हीं परिवहन माध्यमों के जरिए हरियाणा, दिल्ली और आसपास के राज्यों से सस्ती शराब छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक लाकर अवैध रूप से सप्लाई किए जाने की भी आशंका है। यह केवल लकड़ी चोरी का मामला नहीं है। अगर एक ही नेटवर्क जंगल से खैर की लकड़ी बाहर भेजकर दूसरे राज्यों से अवैध शराब छत्तीसगढ़ तक पहुंचा रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है। सरकार को पूरे नेटवर्क की जांच करनी चाहिए और केवल छोटे आरोपियों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखनी चाहिए।
*“तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने पर हुआ जानलेवा हमला”*
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन पर जानलेवा हमला किया गया था, जिसकी एफआईआर आमानाका थाने, रायपुर में दर्ज है। उनके ऊपर हुए हमले के मामले में आरोपियों के खिलाफ बलवा जैसी धाराएं लगाई गई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई। जब तस्करों को कार्रवाई का डर नहीं होगा तो उनका नेटवर्क और मजबूत होगा। आज यही स्थिति जंगलों में दिखाई दे रही है।
*मुख्य आरोपी की गिरफ़्तारी के बाद क्या कार्यवाही हुई :*
8 सितम्बर 2026 को खैर लकड़ी के अवैध परिवहन और फर्जी एनओसी के मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी मनीष अग्रवाल के मकान से 81 लाख रुपये की नकदी जब्त किया था, मामला खैर लकड़ी के अवैध परिवहन के लिए एनटीपीएस (NTPS) एनओसी में कूटरचना कर उसका वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी से जुड़ा था, पुलिस द्वारा खैर लकड़ी की तस्करों और मनीष अग्रवाल पर अब तक और आगे क्या कार्यवाही की गयी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सभी राज्यों की चेकपोस्ट उठा दी गई है लेकिन छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन, जीएसटी डिपार्मेंट और वन विभाग की चार प्रकार की चेकिंग आज भी घूसखोरी को अंजाम दे रही है लकड़ी ड्रग्स गांजा और अन्य प्रकार की अवैध सामग्री छत्तीसगढ़ लाने ले जाने का गेटवे बना हुआ है।
*आप के सरकार से सीधे सवाल*
1. लगातार खैर की बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद खैर की अवैध कटाई के स्रोतों का पता क्यों नहीं लगाया जा रहा?
2. 2021 से 2026 तक सामने आए मामलों को जोड़कर अंतरराज्यीय नेटवर्क की समग्र जांच क्यों नहीं हुई?
3. पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों तक लकड़ी पहुंच रही है तो परिवहन और गोदामों की निगरानी कौन कर रहा है?
4. क्या इन मामलों में बड़े तस्करों और उनके आर्थिक सहयोगियों तक जांच पहुंची है?
5. खैर तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर हमले के मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
6. क्या लकड़ी तस्करी और अवैध शराब की कथित सप्लाई के बीच किसी नेटवर्क की भूमिका है? इसकी ईडी/पुलिस/वन विभाग स्तर पर संयुक्त जांच क्यों नहीं कराई जा रही?








