
रायपुर। स्मार्ट मीटर को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही विभिन्न चर्चाओं और बढ़े हुए बिजली बिल की शिकायतों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने उपभोक्ताओं के सवालों के जवाब दिए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर अपने आप बिजली बिल नहीं बढ़ाता, बल्कि यह वास्तविक बिजली खपत को दर्ज करता है।
कंपनी के जनसंपर्क एवं औद्योगिक संबंध प्रबंधक विकास शर्मा ने बताया कि स्मार्ट मीटर को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार जांच के बाद ही उपभोक्ताओं के घरों में लगाया जाता है। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की रीडिंग पर संदेह है तो वह मीटर परीक्षण के लिए आवेदन कर सकता है।
स्मार्ट मीटर पुराने मीटर से तेज नहीं चलता
कंपनी ने बताया कि स्मार्ट मीटर और पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर में मुख्य अंतर डेटा संग्रह और संचार प्रणाली का है। पुराने मीटर भी बिजली खपत को सटीक दर्ज करते थे, लेकिन स्मार्ट मीटर रियल टाइम डेटा भेजने में सक्षम है। इससे उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को समय-समय पर देख और नियंत्रित कर सकता है।
प्री-पेड मीटर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट
सोशल मीडिया पर चल रही प्री-पेड मीटर की चर्चाओं को कंपनी ने भ्रामक बताया है। कंपनी के अनुसार, आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले की तरह पोस्ट-पेड मीटरिंग व्यवस्था ही लागू रहेगी। प्री-पेड मीटर की व्यवस्था फिलहाल शासकीय कार्यालयों और भवनों के लिए शुरू की जा रही है।
बढ़े हुए बिल के कई कारण संभव
कंपनी ने बताया कि बिजली बिल बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से खपत बढ़ना सामान्य है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, इंडक्शन और अन्य नए उपकरणों के बढ़ने से भी बिजली खपत में वृद्धि हो सकती है।
कई उपभोक्ताओं के बिल में लोड एन्हांसमेंट (भार वृद्धि) शुल्क जुड़ने की वजह भी बताई गई है। कंपनी के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता की अधिकतम मांग लगातार तीन महीने तक स्वीकृत भार से अधिक रहती है तो नियमों के अनुसार भार वृद्धि शुल्क लगाया जा सकता है। यह शुल्क एक बार लिया जाता है और वर्तमान में इसकी दर 800 रुपये प्रति किलोवाट निर्धारित है।
मोर बिजली एप से देख सकेंगे खपत
कंपनी ने उपभोक्ताओं को मोर बिजली मोबाइल एप का उपयोग करने की सलाह दी है। इसके जरिए उपभोक्ता प्रतिदिन की बिजली खपत, अनुमानित यूनिट खर्च और पिछले महीनों की खपत की जानकारी देख सकते हैं। उपभोक्ता अपने घर के सभी उपकरण कुछ समय के लिए बंद कर मीटर रीडिंग की स्थिति भी जांच सकते हैं।
मीटर जांच की सुविधा उपलब्ध
यदि उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली पर संदेह है तो वह टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा विद्युत कार्यालय में चेक मीटर लगाने का अनुरोध किया जा सकता है। मीटर जांच के लिए सिंगल फेज मीटर पर 375 रुपये और थ्री फेज मीटर पर 450 रुपये शुल्क निर्धारित है।
कंपनी ने सोशल मीडिया पर फैल रहे उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा है कि मोबाइल सिग्नल, सिम या रिमोट सिस्टम के जरिए बिल बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि शिकायतों के लिए अधिकृत शिकायत तंत्र का उपयोग करें और तकनीकी जांच के आधार पर समाधान प्राप्त करें।




