विजयादशमी हमें सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

- रायपुर के डब्ल्यूआरएस मैदान में मुख्यमंत्री ने किया रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन, प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं
- छत्तीसगढ़ की संस्कृति और जनआस्था में बसे हैं प्रभु श्रीराम, श्रीरामलला दर्शन योजना से 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या में दर्शन
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विजयादशमी का पर्व हमें अन्याय, असत्य और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देता है। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण है। उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही एक न्यायपूर्ण, समरस और विकसित समाज का निर्माण किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने हजारों लोगों की मौजूदगी में धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की बधाई देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें बुराइयों का त्याग कर सदाचार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान पिछले पांच दशकों से अधिक समय से इस परंपरा का साक्षी रहा है। यहां प्रतिवर्ष होने वाला रावण दहन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम का विशेष आत्मीय संबंध
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती का भगवान श्रीराम से विशेष संबंध रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ इस क्षेत्र के वनांचलों में समय बिताया था। यही कारण है कि भगवान श्रीराम छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जनमानस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों और सिद्धांतों का त्याग नहीं किया। उनका जीवन हमें धैर्य, साहस और मर्यादा के साथ चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सत्य का साथ देने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने में भी दिखाई देना चाहिए।
अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की विजय का प्रतीक है रावण दहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और रावण के बीच का संघर्ष केवल दो शक्तियों का युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय और धर्म के बीच का संघर्ष था। रावण के पास विशाल सेना और अपार सामर्थ्य होने के बावजूद भगवान श्रीराम ने वनवासियों और वानर सेना को साथ लेकर विजय प्राप्त की। यह प्रसंग बताता है कि सच्चाई, एकजुटता और दृढ़ संकल्प के सामने बड़ी से बड़ी शक्ति भी टिक नहीं सकती।
उन्होंने कहा कि रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी समाज को महत्वपूर्ण संदेश देता है। अधर्म और अन्याय का साथ देने वालों को अंततः अपने कर्मों के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य, न्याय, करुणा और मानवता को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।
आतंकवाद के विरुद्ध भारत का संकल्प मजबूत
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। ऑपरेशन सिंदूर ने देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के संकल्प को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। बस्तर सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विश्वास का वातावरण बनाना, विकास की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाना सरकार की प्राथमिकता है। माओवाद के विरुद्ध अभियान को गति मिलने से प्रदेश में स्थायी शांति और विकास की दिशा में प्रयासों को मजबूती मिली है।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों भारतीयों की आस्था, श्रद्धा और लंबे समय से संजोए गए संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास का एक ऐतिहासिक अवसर बना। इस दिन ने देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को नई ऊर्जा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
श्रीरामलला दर्शन योजना से हजारों श्रद्धालुओं को मिला लाभ
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के माध्यम से अब तक छत्तीसगढ़ के 49 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। यह योजना प्रदेश के श्रद्धालुओं को अपनी आस्था के प्रमुख केंद्र तक पहुंचने का अवसर प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों और धार्मिक स्थलों से भी समृद्ध हुई है। राज्य सरकार इन परंपराओं को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है।
समरस और समृद्ध छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में सद्भाव बनाए रखना, कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, न्याय के पक्ष में खड़ा होना तथा अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक सम्मान है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों, सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ को शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समरस और समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा और रायपुर उत्तर के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, श्री जयंती भाई पटेल, श्री सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख श्री जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।




