छत्तीसगढ़राज्यरायपुर

धमतरी में ‘प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी’ से महिलाओं को मिलेगा रोजगार, पहले चरण में स्थापित होंगी 100 पशु उद्यमी इकाइयां

धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी’ की शुरुआत की जा रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित इस परियोजना का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पशुपालन आधारित उद्यमों से जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। परियोजना के पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 100 महिला पशु उद्यमी इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा के निर्देशन में शुरू होने वाली इस पहल के माध्यम से बकरीपालन, देशी मुर्गीपालन और डेयरी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों को कृषि के साथ आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दो चरणों में विकसित होंगी 600 महिला उद्यमी इकाइयां

प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। परियोजना में ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका संबंधी योजनाओं के अभिसरण की भी परिकल्पना की गई है।

पहले चरण में 100 महिला पशु उद्यमी इकाइयां पायलट परियोजना के रूप में विकसित की जाएंगी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2027-28 में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह दोनों चरणों में कुल 600 महिला पशु उद्यमी इकाइयों के विकास की योजना है।

बकरीपालन और देशी मुर्गीपालन से बढ़ेगी आमदनी

धमतरी जिले के कई ग्रामीण परिवार कृषि और मौसमी मजदूरी पर निर्भर हैं। धान की फसल पर निर्भरता और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पूरे वर्ष नियमित आमदनी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में पशुपालन महिलाओं के लिए आय का वैकल्पिक और टिकाऊ माध्यम बन सकता है।

परियोजना के तहत महिलाओं को वैज्ञानिक पद्धतियों से बकरीपालन करने और देशी मुर्गीपालन को आजीविका के एकीकृत मॉडल के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पशुओं के पोषण, नियमित टीकाकरण, बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि पशुधन सुरक्षित रहे और व्यवसाय को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।

जैविक खाद और बाजार से जुड़ाव पर भी जोर

परियोजना में पशुपालन से प्राप्त गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से खाद तैयार करने, उसके संग्रहण और बिक्री को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और महिलाओं को आय के अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे।

उत्पादों की बिक्री में सहायता के लिए बायबैक व्यवस्था के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के विपणन में सुविधा मिलने और आजीविका गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

आत्मनिर्भर महिलाओं से मजबूत होंगे ग्रामीण परिवार

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय, महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी का उद्देश्य महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है। परियोजना के सफल क्रियान्वयन से ग्रामीण परिवारों की आय में विविधता लाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और महिला उद्यमिता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

यह पहल आत्मनिर्भर महिलाओं, सशक्त परिवारों और समृद्ध गांवों के निर्माण की दिशा में धमतरी जिले का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Related Articles

Back to top button