किडनी खराब होने से पहले शरीर दे सकता है ये संकेत, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पेशाब में बदलाव, चेहरे-पैरों में सूजन और लगातार थकान हो सकती है चेतावनी; समय पर जांच से किडनी की बीमारी का पता लगाने में मिलती है मदद

किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के साथ शरीर में नमक व खनिजों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा, किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक हार्मोन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
खराब जीवनशैली, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां किडनी की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। चिंता की बात यह है कि किडनी की बीमारी शुरुआती चरणों में कई बार स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। हालांकि, कुछ शारीरिक बदलाव ऐसे हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
1. पेशाब में बदलाव को न करें नजरअंदाज
पेशाब में लगातार झाग बनना कभी-कभी उसमें प्रोटीन की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। वहीं, पेशाब का गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई देना उसमें खून आने या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। पेशाब की मात्रा या बार-बार पेशाब आने की आदत में बदलाव भी ध्यान देने योग्य है।
यदि ऐसे बदलाव बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लें। केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
2. चेहरे और पैरों में सूजन
किडनी जब शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में तरल जमा हो सकता है। इसके कारण सुबह आंखों के आसपास, पैरों, टखनों या हाथों में सूजन दिखाई दे सकती है।
यदि सूजन लगातार बनी रहती है या इसके साथ सांस लेने में परेशानी होती है, तो जल्द चिकित्सकीय सहायता लें। सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सेवा प्राप्त करें।
3. पर्याप्त आराम के बाद भी थकान
लगातार थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी कई कारणों से हो सकती है। किडनी की पुरानी बीमारी में एनीमिया यानी खून की कमी होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे शरीर में कमजोरी महसूस होती है।
यदि पर्याप्त नींद और आराम के बावजूद थकान बनी रहती है, तो इसे केवल काम का दबाव मानकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर की सलाह से जरूरी जांच कराना उचित है।
4. त्वचा में खुजली और मांसपेशियों में ऐंठन
किडनी की बीमारी बढ़ने पर शरीर में खनिजों और अन्य पदार्थों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों को त्वचा में लगातार खुजली, मांसपेशियों में ऐंठन या नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
हालांकि, इन लक्षणों के पीछे त्वचा संबंधी समस्याओं, पोषण की कमी और अन्य बीमारियों जैसे कई कारण भी हो सकते हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
5. हाई ब्लड प्रेशर पर रखें नजर
हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारी का आपस में गहरा संबंध है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
इसलिए समय-समय पर बीपी की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे नियंत्रित रखें। यदि आपको डायबिटीज या पहले से किडनी की बीमारी है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
किडनी स्वस्थ है या नहीं, कैसे पता करें?
किडनी की कार्यक्षमता जानने के लिए डॉक्टर कुछ प्रमुख जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
- सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर (eGFR): इनसे किडनी की खून छानने की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलती है।
- यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात (uACR): इससे पेशाब में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है।
- ब्लड प्रेशर की जांच: हाई बीपी किडनी की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है।
- अन्य जांच: जरूरत के अनुसार डॉक्टर पेशाब की सामान्य जांच, अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
ध्यान रखें कि किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो स



