
रायपुर । दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सही अवसर मिल जाए तो सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है। इसका उदाहरण सक्ती जिले के ग्राम सुखदा की 31 वर्षीय बद्रिका पारस चन्द्रा हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ लेकर सोया पनीर निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आज स्वरोजगार के जरिए वे आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
आर्थिक तंगी बनी चुनौती, सरकारी सहायता से मिली राह
स्नातक तक शिक्षित बद्रिका का सपना अपना व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का था। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए सोया पनीर निर्माण उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया। हालांकि, व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी पूंजी जुटाना उनके सामने बड़ी चुनौती थी।
इसी दौरान प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना उनके लिए मददगार साबित हुई। योजना के तहत सोया पनीर निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए उन्हें 4 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके अलावा 1 लाख 75 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। इस आर्थिक सहयोग से उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में मदद मिली।
स्वरोजगार से बनाई नई पहचान
वित्तीय सहायता का उपयोग करते हुए बद्रिका ने सोया पनीर निर्माण का काम शुरू किया और अब अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं। उनकी यह पहल बताती है कि उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।
बद्रिका की सफलता उन महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपना रोजगार शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अवसरों का सही उपयोग कर आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है।
छोटे उद्योगों को बढ़ावा दे रही योजना
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का उद्देश्य छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोत्साहित करना और उन्हें आगे बढ़ने में सहायता देना है। ऐसी योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, स्थानीय उद्यमों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलती है।
बद्रिका पारस चन्द्रा की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है, जहां सरकारी सहायता और व्यक्तिगत प्रयासों के मेल से आत्मनिर्भरता की नई राह खुली है।



