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जगदलपुर में देशभर के सहकारिता मॉडल पर मंथन

राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यों ने साझा किए नवाचार और सफल अनुभव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा

रायपुर । देश में सहकारिता आंदोलन को नई गति देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बस्तर के जगदलपुर में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी जुटे। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की सहकारी गतिविधियों, उपलब्धियों और नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन में राज्यों के सफल सहकारी मॉडलों को दूसरे क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं के साथ सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और कारोबार विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों के अनुभव साझा करते हुए सहकारिता क्षेत्र को अधिक प्रभावी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुझाव दिए।

राज्यों ने साझा किए अपने सफल मॉडल

छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना की अध्यक्षता में आयोजित पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के सत्र में छत्तीसगढ़ के साथ असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने अपनी सहकारी पहलों और उपलब्धियों की जानकारी दी।

वहीं पश्चिमी एवं दक्षिणी राज्यों के सत्र में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गोवा और महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और सफल प्रयोगों को साझा किया।

तकनीक और डिजिटल व्यवस्था पर जोर

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में एमपैक्स के गठन एवं विस्तार, पैक्स के कंप्यूटरीकरण, अनाज भंडारण योजना, सहकारी बैंकिंग और कारोबार में विविधीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

इसके साथ ही राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, तकनीकी सहायता इकाई और नई राष्ट्रीय सहकारी नीति की आगामी कार्ययोजना पर भी प्रस्तुतियां दी गईं। अधिकारियों ने माना कि डिजिटल तकनीक और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाया जा सकता है।

‘सहकार से समृद्धि’ को जमीन पर उतारने पर जोर

सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को प्रभावी रूप से लागू करना रहा। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सहकारी संस्थाओं को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक कारोबार, वित्तीय सेवाओं और ग्रामीण रोजगार से जोड़ा जाए।

देशभर से आए अधिकारियों ने अपने अनुभवों के आधार पर सहकारी संस्थाओं की पहुंच बढ़ाने, कामकाज में पारदर्शिता लाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

जगदलपुर में आयोजित यह सम्मेलन विभिन्न राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान और सहकारिता क्षेत्र में बेहतर मॉडल विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया।

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