धरती पर मौजूद है मंगल का ‘हमशक्ल’, अटाकामा रेगिस्तान में वैज्ञानिकों को मिले लाल ग्रह जैसे हालात
जहां सालों तक नहीं होती बारिश, मिट्टी में जीवन के निशान ढूंढना भी मुश्किल; मंगल मिशनों की तैयारी के लिए वैज्ञानिकों का अहम ठिकाना बना चिली का अटाकामा

नई दिल्ली। मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश और भविष्य में इंसानों को वहां बसाने की कवायद अब सिर्फ विज्ञान कथाओं तक सीमित नहीं है। दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार लाल ग्रह को समझने की कोशिश कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंगल की कठिन परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। दक्षिण अमेरिका का अटाकामा रेगिस्तान धरती पर ही मंगल जैसे वातावरण का एक अनोखा उदाहरण पेश करता है।
मंगल जैसी परिस्थितियां क्यों हैं यहां?
उत्तरी चिली में फैला अटाकामा दुनिया के सबसे शुष्क गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां कुछ इलाकों में बारिश इतनी कम होती है कि वर्षों तक जमीन पर पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचती। बेहद कम नमी, सूखी हवा और मिट्टी की विशिष्ट रासायनिक संरचना इसे मंगल ग्रह के वातावरण और सतह के अध्ययन के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
यही कारण है कि वैज्ञानिक मंगल पर भेजे जाने वाले उपकरणों और जीवन की खोज से जुड़े प्रयोगों की शुरुआती जांच धरती पर ही इस रेगिस्तान में करते हैं।
14 साल तक नहीं हुई बारिश
अटाकामा की शुष्कता का अंदाजा पुराने मौसम रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, चिली के अरीका क्षेत्र में अक्टूबर 1903 से जनवरी 1918 तक करीब 172 महीने तक बारिश दर्ज नहीं की गई थी। यानी लगभग 14 वर्षों तक लगातार सूखे की स्थिति बनी रही।
2003 के प्रयोग ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की दिलचस्पी
अटाकामा की मिट्टी पर 2003 में किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने वैज्ञानिकों को काफी हैरान किया। शोधकर्ताओं ने मिट्टी के नमूनों में सूक्ष्मजीवों और जैविक गतिविधि की मौजूदगी की जांच की। कुछ नमूनों में DNA तक नहीं मिला।
वैज्ञानिकों ने यहां ऐसे प्रयोग भी किए, जिनका इस्तेमाल मंगल ग्रह पर जीवन की खोज के संदर्भ में किया जा चुका है। परिणामों से संकेत मिला कि अटाकामा की कठोर मिट्टी जैविक पदार्थों को संरक्षित रखने के बजाय उन्हें नष्ट करने में सक्षम हो सकती है। इस वजह से यह क्षेत्र मंगल की सतह पर जीवन की खोज से जुड़े उपकरणों की क्षमता जांचने के लिए महत्वपूर्ण बन गया।
युंगाय से आगे बढ़ी खोज
लंबे समय तक युंगाय क्षेत्र को अटाकामा के सबसे सूखे हिस्सों में प्रमुख माना जाता था। बाद में वैज्ञानिकों ने मारिया एलेना साउथ क्षेत्र में भी बेहद कम नमी वाली परिस्थितियों का अध्ययन किया। यहां दर्ज वातावरण ने मंगल ग्रह के कुछ इलाकों में रोवर द्वारा दर्ज किए गए वातावरण से तुलना का अवसर दिया।
आखिर इतना सूखा क्यों है अटाकामा?
अटाकामा की भौगोलिक स्थिति इसकी शुष्कता की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। एंडीज पर्वतमाला पूर्व से आने वाली नमी को रोकती है, जबकि प्रशांत महासागर की ठंडी हम्बोल्ट धारा वातावरण में बादल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इन प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यहां बारिश बेहद दुर्लभ हो जाती है।
मंगल मिशनों के लिए बनी प्राकृतिक प्रयोगशाला
अटाकामा वैज्ञानिकों के लिए किसी प्राकृतिक प्रयोगशाला से कम नहीं है। यहां मंगल जैसे कठोर और शुष्क वातावरण में रोवर, सेंसर और जीवन की खोज से जुड़े उपकरणों का परीक्षण किया जा सकता है। इससे वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि किसी दूसरे ग्रह पर जीवन के संकेत तलाशते समय मशीनें किन परिस्थितियों में गलत परिणाम दे सकती हैं।
भविष्य में जब इंसान मंगल की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा, तब लाल ग्रह की तैयारी में अटाकामा जैसे धरती के चरम वातावरणों में किए गए प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।




