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सोना हुआ महंगा तो चांदी पर टूटे खरीददार, लेकिन हर तीसरा ग्राहक हुआ ठगी का शिकार; अब क्या करेगी सरकार?

नई दिल्ली। सोने की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने चांदी का रुख किया है, लेकिन बढ़ती मांग के साथ चांदी में भी ठगी का खतरा बढ़ता जा रहा है। स्थिति है कि चांदी खरीदने वाला लगभग हर तीसरा ग्राहक किसी न किसी रूप में धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है।

यही वजह है कि लगभग 93 प्रतिशत उपभोक्ता चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें शुद्धता की गारंटी मिले। लोकल सर्किल द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़े इस चिंता को और गंभीर बनाते हैं।

सर्वे में शामिल 31 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि चांदी खरीदते समय उन्हें कम शुद्धता वाला या गलत उत्पाद देकर ठगा गया। इनमें से 23 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनके साथ ऐसा धोखा एक से अधिक बार हुआ। जाहिर है, समस्या व्यापक है। शिकायतें सिर्फ छोटी दुकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी ग्राहकों को ऐसे ही अनुभव हो रहे हैं।

चांदी में ठगी का बड़ा कारण इसकी शुद्धता की पहचान का कठिन होना है। आम ग्राहक के लिए समझना असंभव होता है कि उत्पाद कितनी शुद्ध चांदी से बना हुआ है। ऐसे में हालमार्किंग ही विश्वास बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

इसके साथ दिया जाने वाला हालमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) नंबर ग्राहक को उत्पाद की प्रामाणिकता और शुद्धता की डिजिटल जांच की सुविधा भी देता है। हालमार्किंग को लेकर जागरूकता भी तेजी से बढ़ रही है।

चांदी पर भी हालमार्क

वित्त वर्ष 2024-25 में जहां लगभग 32 लाख चांदी के आभूषण हालमार्क किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 59 लाख पहुंच गई। करीब 84 प्रतिशत की यह वृद्धि बताती है कि उपभोक्ता और कारोबारी दोनों गुणवत्ता प्रमाणन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।बाजार की स्थिति भी हालमार्किंग की मांग को मजबूती देती है। चांदी की कीमत दो लाख 40 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बनी हुई है।

ऐसे में शुद्धता में मामूली कमी भी ग्राहकों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। गांवों और कस्बों में, जहां चांदी को आभूषण के साथ-साथ बचत और निवेश का माध्यम भी माना जाता है, वहां यह जोखिम और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

सरकार ने एक सितंबर 2025 से हालमार्क कराए गए चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों पर एचयूआईडी अंकित करना जरूरी कर दिया है। हालांकि चांदी की हालमार्किंग अब भी स्वैच्छिक है। यानी बाजार में बिकने वाले सभी चांदी उत्पादों पर हालमार्क होना अनिवार्य नहीं है। यही कारण है कि ग्राहकों का एक बड़ा वर्ग इसे अनिवार्य बनाने की मांग कर रहा है।

क्या बोलीं निधि खरे?

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि फिलहाल यह व्यवस्था स्वैच्छिक है, लेकिन ग्राहकों को राहत देने के लिए सरकार पूरे मामले पर विचार-विमर्श कर रही है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) चांदी की अनिवार्य हालमार्किंग लागू करने की संभावनाओं और उससे जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है।उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार सोने की तुलना में चांदी का बाजार अधिक व्यापक और विविध है।

इसका उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि बर्तनों, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए अनिवार्य हालमार्किंग लागू करने से पहले आवश्यक प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

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