10 राज्यों पर अल नीनो का साया, खरीफ फसलों के लिए जारी किया गया ये अलर्ट

चालू खरीफ सीजन के बीच भारतीय एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए एक अहम खबर सामने आई है। देश के लगभग 9 से 10 राज्यों पर इस बार अल नीनो का साया मंडरा रहा है। इससे खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। इस संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को खरीफ की तैयारियों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए एक बड़ा अलर्ट जारी किया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अल नीनो से प्रभावित होने वाले संभावित 9-10 राज्यों में जिला स्तर तक तुरंत आपातकालीन योजना तैयार की जाए ताकि देश के अन्नदाताओं को किसी भी संकट से बचाया जा सके।
प्रभावित होने वाले 9-10 राज्यों के लिए सुपर प्लान तैयार
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे राज्यों के लिए तुरंत तालमेल बिठाकर काम करने के निर्देश दिए हैं जिनके अल नीनो से प्रभावित होने का खतरा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों के जिला अधिकारियों, राज्य कृषि विभागों, कृषि विज्ञान केंद्रों और दूसरी विस्तार एजेंसियों को मिलकर जिला स्तर पर कॉर्डिनेटेड बैठकें करनी चाहिए।
राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे कम बारिश वाले और मौसम के प्रति सबसे संवेदनशील जिलों की पहचान करें। इसके बाद फसल के हिसाब से कंटिजेंसी प्लान पहले से तैयार रखें ताकि मौसम की अनिश्चितता की स्थिति में किसानों को तुरंत वैकल्पिक विकल्प, सही सलाह और सरकारी सहायता दी जा सके।
किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक समाधान
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि सरकार का मकसद किसानों के बीच डर पैदा करना नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसानों तक डराने या घबराहट पैदा करने वाले संदेश न जाएं। इसकी जगह उन्हें वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित विश्वसनीय संदेश और सलाह मिलनी चाहिए।
कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि अल नीनो से प्रभावित होने वाले हर संवेदनशील जिले के लिए एक व्यावहारिक और अलग रणनीति बनाई जाए। इसमें मुख्य रूप से चार बिंदुओं जल संरक्षण, मिट्टी की नमी का प्रबंधन, इंटरक्रॉपिंग और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर ध्यान दिया जाए।
कपास और दालों के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर
इस समीक्षा बैठक में खरीफ के लिए फसल के हिसाब से लक्ष्यों, बुवाई की प्रगति और राज्य-वार तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की गई। इस बार सरकार का विशेष ध्यान कपास और दालों के रकबे और उत्पादन को बढ़ाने पर है। कपास की उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार के लिए कृषि मंत्री ने वैज्ञानिक तरीकों को व्यापक रूप से अपनाने, सही किस्म के बीजों का चयन करने, मल्चिंग और नमी संरक्षण तकनीकों पर जोर दिया।
भारत की दालों के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके तहत फसल चक्र, क्षेत्र विस्तार, उन्नत बीजों की उपलब्धता और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से अरहर, उड़द, और मूंग की खेती का दायरा बढ़ाया जाएगा।
देश में यूरिया-खाद का पर्याप्त स्टॉक, माइक्रो-लेवल पर रखी जा रही नजर
बैठक में देश भर के जलाशयों के जल स्तर, पानी के भंडारण, बाजार में फसलों की कीमतों और उर्वरकों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने देश के किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों (खाद) की उपलब्धता पूरी तरह से पर्याप्त है।
उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि जैसे-जैसे मानसून आगे बढ़े, यह सुनिश्चित किया जाए कि उन दूरदराज के इलाकों में भी खाद की एडवांस सप्लाई पहुंच जाए जहां माइक्रो-लेवल (छोटे स्तर) पर किल्लत होने की थोड़ी भी आशंका हो।
लैब से लैंड तक पहुंचेगा तकनीकी ज्ञान
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विभागों के बीच और अधिक मजबूत समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी तकनीकी ज्ञान या रिसर्च केवल कागजों या लैब में सीमित नहीं रहनी चाहिए।
तकनीकी ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समय पर सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे। उन्होंने खरीफ सीजन को पूरी तरह सफल और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकारियों को लगातार जमीनी स्तर से फीडबैक लेने, नियमित समीक्षा करने और किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का आह्वान किया है।



