
कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन
दो माह में 5 हजार किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य

प्राकृतिक एवं जैविक खेती पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और किसानों की लागत को कम करने (शून्य-बजट खेती) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह रासायनिक खादों की निर्भरता को समाप्त कर देसी गाय के उत्पादों और स्थानीय जैव-मास पर आधारित होती है। जैविक जिला दंतेवाड़ा में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विकासखंड कुआकोंडा के ग्राम गढ़मिरी से ब्रह्मास्त्र, जीवामृत मछली टॉनिक एवं थ्रीजी दवाई वितरण अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है।
स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पाद
विशेष बात यह है कि ब्रह्मास्त्र, जीवामृत मछली टॉनिक और थ्रीजी दवाई का निर्माण स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे जहां किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
पहले चरण में 20 किसानों को मिला लाभ
अभियान के प्रथम चरण में 20 किसानों को ब्रह्मास्त्र, जीवामृत मछली टॉनिक और थ्रीजी दवाई वितरित की गई। इन जैविक उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रति किसान से केवल 280 रुपये अंशदान लिया जा रहा है, जबकि जिला प्रशासन द्वारा 1000 रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल
जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के मार्गदर्शन में संचालित यह अभियान किसानों को कम लागत वाली टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। ब्रह्मास्त्र एवं जीवामृत मछली टॉनिक जैसे जैविक उत्पाद फसलों की वृद्धि, उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
5 हजार किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य
उप संचालक कृषि श्री सूरज पंसारी ने बताया कि आगामी दो माह के भीतर जिले के 5 हजार किसानों तक ब्रह्मास्त्र जीवामृत मछली टॉनिक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने और जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
किसानों ने किया पहल का स्वागत
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जैविक कृषि आधारित ऐसे नवाचार खेती की लागत कम करने, भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे। इसमें महंगे रसायनों और कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे खेती का खर्च लगभग शून्य हो जाता है।
आत्मनिर्भर और सतत कृषि की ओर बढ़ता दंतेवाड़ा
जिला प्रशासन ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ कृषि उत्पादन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। यह अभियान जैविक कृषि, ग्रामीण आजीविका संवर्धन और सतत विकास की दिशा में दंतेवाड़ा जिले का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




