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चीनी के दाम ने बढ़ाई मिठास की कीमत, 65 रुपये के पार पहुंचा भाव

लखनऊ। चाय की चुस्की हो या मिठाई का स्वाद, इन दिनों चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। देश के कई हिस्सों में चीनी के खुदरा दाम तेजी से बढ़े हैं और बाजार में कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंचने की बात सामने आ रही है। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के आयात करने की अनुमति दी है।

बताया जा रहा है कि करीब एक दशक बाद भारत को घरेलू मांग पूरी करने के लिए चीनी का आयात करना पड़ रहा है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

एक महीने में करीब 20 फीसदी बढ़े दाम

चीनी की कीमतों में अगस्त महीने में तेजी देखी गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त को खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत करीब 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक महीने पहले यह करीब 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी एक महीने के भीतर कीमत में करीब 20 फीसदी का अंतर आया है।

20 अगस्त 2025 को चीनी की कीमत करीब 46.30 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई थी। बाजार के जानकारों के मुताबिक, मौजूदा तेजी घरेलू आपूर्ति पर बढ़ते दबाव और उत्पादन में कमी से जुड़ी है।

घरेलू उत्पादन में आई कमी

चीनी की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह देश में उपलब्धता को लेकर बढ़ता दबाव माना जा रहा है। चीनी मिलों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष केतन पटेल के मुताबिक, चीनी वर्ष 2025-26 में देश में चीनी उत्पादन करीब 3.2 करोड़ टन रहने का अनुमान था, लेकिन वास्तविक उत्पादन करीब 3 करोड़ टन ही रहने का अनुमान है।

उत्पादन में यह कमी ऐसे समय आई है जब घरेलू बाजार में चीनी की मांग लगातार बनी हुई है। इससे बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली।

मौसम भी बढ़ा रहा मुश्किल

चीनी की कीमतों पर मौसम का असर भी पड़ रहा है। पिछले साल अधिक बारिश के कारण कई क्षेत्रों में गन्ने की फसल प्रभावित हुई थी। वहीं, इस साल कमजोर मानसून को लेकर चिंता जताई जा रही है। बारिश की कमी से गन्ने की बुवाई और आगामी फसल पर असर पड़ने की आशंका है।

इसके अलावा अल नीनो की संभावित स्थिति भी कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। यदि बारिश अनुमान के मुताबिक कमजोर रहती है तो गन्ने की खेती प्रभावित हो सकती है और आने वाले वर्षों में चीनी उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में अधिक उत्पादन देने वाली सीओ-0238 गन्ने की किस्म में गेरुआ रोग फैलने की बात भी सामने आई है। गन्ने की फसल में बीमारी और मौसम से जुड़ी चुनौतियां चीनी उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता

आने वाले दिनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में मांग बढ़ने के साथ अगर आपूर्ति सामान्य नहीं रही तो कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है।सरकार इसी स्थिति को देखते हुए घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है।

सरकार ने उठाए कई कदम

बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे। इसके साथ ही थोक कारोबारियों के पास चीनी के भंडारण को लेकर स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है।

अब 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने से घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतों में अनावश्यक तेजी पर रोक लगाई जा सके।हालांकि, चीनी की कीमतें आने वाले दिनों में किस स्तर पर रहती हैं, यह घरेलू उत्पादन, मौसम, गन्ने की फसल और बाजार में आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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