
रायपुर।.छत्तीसगढ़ में डीजल की आपूर्ति और खपत को लेकर राज्य सरकार की समीक्षा में एक बड़ा संकेत सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक और थोक उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे जाने वाले कमर्शियल डीजल की खपत फरवरी की तुलना में अप्रैल-मई के दौरान 35 प्रतिशत तक घट गई है। इसके बाद सरकार ने आशंका जताई है कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता महंगा कमर्शियल डीजल खरीदने के बजाय आम उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित खुदरा पेट्रोल पंपों से डीजल उठा रहे हैं। इसी आशंका की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकारी प्रस्तुतीकरण के अनुसार राज्य में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कुल 248 औद्योगिक एवं थोक उपभोक्ताओं ने फरवरी 2026 में 60,721 किलोलीटर डीजल खरीदा था। यह मात्रा अप्रैल-मई में घटकर 39,692 किलोलीटर और मई में 23,533 किलोलीटर रह गई। फरवरी की तुलना में कुल बिक्री में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
सबसे बड़ी गिरावट इंडियन ऑयल के उपभोक्ताओं में दर्ज की गई, जहां बिक्री में 46 प्रतिशत की कमी आई। भारत पेट्रोलियम में 24 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
रायगढ़, रायपुर और कोरबा सबसे अधिक निगरानी में
जिलावार आंकड़ों से पता चलता है कि रायगढ़, रायपुर और कोरबा में ऐसे औद्योगिक या थोक उपभोक्ताओं की संख्या सबसे अधिक है जिनका डीजल उठाव पिछले वर्ष की तुलना में कम हुआ है। रायगढ़ में अप्रैल में 25 और मई में 16, रायपुर में 22 और 18, जबकि कोरबा में 20 और 17 उपभोक्ता इस श्रेणी में पाए गए।
ये तीनों जिले बड़े औद्योगिक केंद्र हैं, इसलिए यहां की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।
पेट्रोल पंपों पर ड्रम और कैन में बिक्री पर रोक
डीजल की उपलब्धता बनाए रखने और कथित डायवर्जन रोकने के लिए राज्य सरकार ने 22 मई को सभी 2,516 पेट्रोल-डीजल पंपों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ड्रम, जरीकेन, बोतल या अन्य पात्रों में डीजल-पेट्रोल की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। केवल वाहन के टैंक में ही ईंधन भरने की अनुमति होगी।
हालांकि किसानों, आवश्यक सेवाओं और कलेक्टर द्वारा चिन्हित समयबद्ध शासकीय निर्माण कार्यों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों और थोक उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता का डीजल सीधे बल्क लोडिंग प्वाइंट या अपने कंज्यूमर पंप से वाणिज्यिक दर पर लेना होगा। आवश्यकता पड़ने पर औद्योगिक बल्क लोडिंग प्वाइंट की क्षमता बढ़ाने के लिए तेल कंपनियों से समन्वय करने को भी कहा गया है।
सरकार का तर्क है कि इससे सार्वजनिक खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव कम होगा और जमाखोरी या डीजल डायवर्जन जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
कलेक्टरों को साप्ताहिक समीक्षा और कार्रवाई के निर्देश
राज्य सरकार ने जिलों को असामान्य रूप से अधिक डीजल बेचने वाले पेट्रोल पंपों की आकस्मिक जांच करने और नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला कलेक्टरों को तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करने के लिए कहा गया है।
इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ में डीजल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है और सरकार अब यह पता लगाने में जुटी है कि औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा कमर्शियल डीजल के बजाय खुदरा नेटवर्क से ईंधन उठाने की प्रवृत्ति कितनी व्यापक है। यदि जांच में ऐसे मामले सामने आते हैं तो संबंधित पेट्रोल पंपों और उपभोक्ताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।




