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शाह और सुवेंदु की जोड़ी ने पलटी बंगाल की बाजी, क्या है बीजेपी की जीत की इनसाइड स्टोरी?

नई दिल्ली। बंगाल में ममता को हराने के लिए भाजपा ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी थी। इसका नतीजा यह रहा कि, 207 सीटों के साथ भाजपा पहली बार बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने CM ममता बनर्जी को हराया था। यह 2026 की इस बड़ी हार की सिर्फ शुरूआत थी।

इसके बाद शुरू हुआ ममता को बंगाल से पूरी तरह उखाड़ फेंकने का असली खेल। हालांकि, इस चुनौती में सबसे मुश्किल पड़ाव था भवानीपुर में ममता को हार का मुंह दिखाना। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने इसके लिए जुझारू और एक काबिल नाम सुवेंदु अधिकारी को चुना। शाह ने उनके साथ मिलकर भवानीपुर के लिए एक समर्पित टीम तैयार करने का काम शुरू किया, ताकि उनकी रणनीति पर असरदार तरीके से अमल हो सके।

गुजराती और मारवाड़ी वोटर ने पलटी बाजी

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार BJP के चुनावी अभियान से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कोलकाता में उन्होंने जितनी भी रातें बिताईं, हर रात उन्होंने सिर्फ इसी सीट पर केंद्रित बैठकें कीं। चूंकि इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 25,000 गुजराती और 21,000 मारवाड़ी वोटर थे। ये ऐसे समुदाय थे जिनके वोट जीत-हार का पलड़ा भारी कर सकते थे। इसलिए शाह ने इन समुदायों के अलग-अलग समूहों से मुलाकात की।

इन मुलाकातों के दौरान, एक अनौपचारिक डिनर के सौहार्दपूर्ण माहौल में, इन लोगों ने अपने विचार शाह के साथ साझा किए। इन समुदायों ने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में TMC के सदस्यों ने उन्हें वोट डालने से रोकने के लिए बाहुबल का इस्तेमाल किया था, और अक्सर उनके नाम पर फर्जी वोट डाल दिए जाते है।

बूथ-स्तरीय प्रभारी ने जमीनी स्तर पर काम किया

इसी कड़ी में BJP के एक पदाधिकारी ने बताया, “उन्होंने कहा कि अगर उनकी सोसाइटियों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए, तो वे बिना किसी डर के वोट डाल पाएंगे। शाह ने यह सुनिश्चित किया कि ऐसी हर जगह पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाए।” इसके साथ ही शाह की टीम ने भवानीपुर के हर बूथ पर एक समर्पित बूथ-स्तरीय प्रभारी भी नियुक्त किया।

उनका काम दो तरह का था। पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अंदरूनी कलह या मतभेद को उजागर करना, और जमीनी स्तर पर TMC द्वारा की जा रही किसी भी तरह की गुंडागर्दी या दबाव की रिपोर्ट करना। शाह का निजी लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि BJP के सभी कार्यकर्ता सुबह 11 बजे से पहले ही अपना वोट डाल लें, और उसके बाद पार्टी के लिए ज्यादा से ज्यादा वोट डलवाने के काम में जुट जाए

SIR ने भी जीत में मदद की

इस काम में BJP के अन्य सदस्यों को भी लगाया गया। जिनमें दूसरे राज्यों के ऐसे विधायक भी शामिल थे। जिनसे स्थानीय समुदाय आसानी से जुड़ाव महसूस कर सकते थे। इसके अलाव SIR प्रक्रिया के जरिए, भवानीपुर की वोटर लिस्ट से लगभग 47,000 नाम हटा दिए गए। ये या तो ऐसे वोटर थे जिनकी मौत हो चुकी थी, या फिर डुप्लीकेट एंट्री थीं। जिनका कथित तौर पर TMC ने फर्जी वोट डालने के लिए गलत इस्तेमाल किया था।

आखिरकार, इन सभी प्रयासों का नतीजा यह निकला कि ममता को 15,000 से ज्यादा वोटों से करारी हार का सामना करना पड़ा। जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों को थी, भले ही उन्होंने यह आरोप लगाया कि अलोकतांत्रिक तरीकों से उनसे और उनकी पार्टी से चुनाव छीन लिया गया।

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