छत्तीसगढ़राज्य

रायपुर में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित

समय पर पहचान और बेहतर रेफरल व्यवस्था से रोगियों को मिलेंगी अधिक समग्र स्वास्थ्य सेवाएं

रायपुर में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण पर राज्य स्तरीय बैठक आयोजित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा PATH एवं The Bristol Myers Squibb Foundation के सहयोग से टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण विषय पर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक का उद्देश्य टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध जांच एवं निदान तंत्र का प्रभावी उपयोग करते हुए फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान एवं देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।
बैठक में राज्य क्षय अधिकारी एवं उप संचालक (एनसीडी) डॉ. संजीव मेश्राम तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर डॉ. मिथलेश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं बिलासपुर के प्रतिनिधियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों तथा टीबी एवं गैर-संचारी रोग ( NCD ) के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान PATH के उप निदेशक डॉ. अजय पाटले ने टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के आकलन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध स्क्रीनिंग एवं डायग्नोस्टिक व्यवस्थाओं का उपयोग फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अपने संबोधन में डॉ. संजीव मेश्राम ने समय पर जांच, शीघ्र पहचान एवं प्रभावी रेफरल व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं का एकीकरण किया जा सकता है, जिससे रोगियों को अधिक समग्र, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएं साझा कीं। इन सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के एकीकृत मॉडल को विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से दोनों रोगों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रबंधन तथा रोगियों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा।

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