
रायपुर। राजधानी रायपुर के संजय नगर स्थित फ़ैज़ाने मदीना मस्जिद में आज बाद नमाज़े ज़ोहर दावते इस्लामी इंडिया के मुबल्लिग शहज़ाद अत्तारी द्वारा मैय्यत को कफन, दफन, गुस्ल का प्रैक्टिकल तरीका सिखाया और बताया गया जिसे मस्जिद के जमातिया द्वारा बड़े ही गौर से सुना, समझा और जाना गया। आम तौर से बयान में लोगो को उक्त मसले को बोल कर ही समझाया जाता है परंतु इस मसले को आज पहली बार प्रैक्टिकल रूप से कर के दिखाया और समझाया गया।
दावते इस्लामी इंडिया के मुबल्लिग शहज़ाद अत्तारी ने बताया कि शरीयत के अनुसार मैय्यत (मृतक) का कफन-दफन एक सम्मानजनक और सरल प्रक्रिया है। पुरुष के लिए कफन के 3 (तहबंद, कमीज, लिफाफा) और महिला के लिए 5 कपड़े होते हैं। गुस्ल के बाद शरीर को ढककर, इत्र लगाकर या अगरबत्ती की धुनी देकर कफन पहनाया जाता है और फिर जनाज़े की नमाज पढ़कर उसे क़बर में दाहिनी करवट क़िबला-रू दफनाया जाता है।
कफन-दफन का प्रैक्टिकल तरीका…
कफन की तैयारी (पुरुष): 3 कपड़े – एक तहबंद (इजार), एक कमीज (कफनी – बिना आस्तीन/कंधे की), और एक बड़ी चादर (लिफाफा) जो सिर और पैर की तरफ बांधी जा सके।
कफन की तैयारी (महिला): 5 कपड़े – एक इजार (तहबंद), एक कमीज, एक ओढ़नी (बालों के लिए), एक सीना बंद (छाती के लिए), और एक बड़ी चादर (लिफाफा)।
कफन पहनाने का तरीका…
लिफाफा (बड़ी चादर) को फैलाएं, उस पर कमीज और फिर इजार रखें।
गुस्ल के बाद शरीर को तौलिये से सुखाएं और इत्र लगाएं।
पहले इजार (तहबंद) फिर कमीज पहनाएं।
अंत में लिफाफे (चादर) को बाईं तरफ से, फिर दाईं तरफ से लपेटें और सिर व पैरों की तरफ कफन के कपड़ों से ही बांध दें।
दफन का तरीका (तदफीन)…
जनाज़े की नमाज़ अदा करें।
कब्र में मैय्यत को उतारते समय “बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह” कहें।
मैय्यत को क़बर में दाईं करवट से क़िबला की तरफ (मक्का की दिशा में) लिटाएं।
कफन की गांठें खोल दें।
कब्र पर मिट्टी डालें और दुआ करें।
शहज़ाद अत्तारी ने बताया कि कफन सादा, सफेद और सूती (कॉटन) होना बेहतर है।
महिला के बालों को दो हिस्सों में करके सीने पर ओढ़नी के नीचे डाला जाता है।
दफन के समय चेहरे को कुछ समय के लिए खोला जा सकता है।
ध्यान देने वाली बातें…
कफन-दफन के दौरान चेहरे को ढका रहना चाहिए, और किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची या गैर-शरई रस्मों से बचना चाहिए।




