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बिहार चुनाव में करारी हार पर पाकिस्तान का कौन सा उदाहरण ले आए प्रशांत किशोर

बिहार में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की करारी हार के बाद वह पहली बार सामने आए। उन्होंने कहा कि प्रयास ईमादारी से किया गया लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आए और इसकी 100 फीसदी जिम्मेदारी मेरी है। प्रशांत किशोर ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का उदाहण दिया कि उन्होंने 25 साल पहले राजनीति शुरू की और शुरुआत में सातों सीटों पर चुनाव हार गए। उन्होंने कहा कि गहरा झटका मिला लेकिन हम गलतियों को सुधारेंगे, मजबूत हो कर लौटेंगे, पीछे जाने का सवाल ही नहीं उठता।

किशोर ने कहा, लोग चर्चा करते हैं कि मेरा चुनाव लड़ना फायदेमंद रहा कि नहीं। मैं स्वीकार करता हूं कि मैं बिहार को समझ नहीं पाया। मैं यह भी नहीं समझ पाया कि कैसे लालू यादव और सम्राट चौधरी ने बिहार को धर्म और जाति के आधार पर बांट दिया। राज्य को सुधारना कोई अपराध नहीं है। लोगों ऐसे बोलते हैं जैसे कि मैंने कोई अपराध कर दिया है।

पीके ने कहा, जनता ने एनडीए को जनादेश दिया है, चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करना मोदी, नीतीश की जिम्मेदारी है। राजनीति छोड़ने के दावे को लेकर उन्होंने कहा कि अगर नीतीश सरकार चुनाव पूर्व किए गए वादे के अनुसार, सभी डेढ़ करोड़ लोगों को दो-दो लाख रुपये देती है तो निश्चित रूप से मैं राजनीति छोड़ दूंगा। किशोर ने यह भी कहा कि वह अदालत और जनता, दोनों मंचों पर “गलत काम करने वाले मंत्रियों” के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने अपना संपर्क नंबर जारी करते हुए कहा कि जिन लाभार्थियों को वादे के अनुसार पैसे नहीं मिलते, वे जन सुराज से जुड़ें, उनकी लड़ाई जनसुराज लड़ेगी। किशोर ने कहा “अब सलाह का समय खत्म, संघर्ष का समय शुरू है,।”

किशोर ने कहा, ‘‘यह प्रायश्चित का उपवास होगा। जन सुराज के सभी साथी समझें कि हमारी कोशिशें पर्याप्त नहीं रहीं और वे जहां हों, वहां सामूहिक उपवास कर सकते हैं। किशोर ने दावा किया कि इस चुनाव में बिहार की राजनीति “स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार” ऐसे मोड़ पर पहुंची, जहां “करीब 40,000 करोड़ रुपए की योजनाएं चुनाव के दौरान जनता तक पहुंचाई गईं।”

उन्होंने आरोप लगाया, “साफ दिखता है कि लगभग 29,000 करोड़ रुपए बांटे गए। जीविका समूहों की महिलाएं हों, आशा-आंगनबाड़ी से जुड़ी महिलाएं हों या प्रवासी मजदूर—सबको चुनाव के वक्त सीधे पैसे दिए गए। यह सरकारी योजना कम और वोट खरीदने का तरीका ज्यादा लगता है।” उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्येक लाभार्थी को यह बताया कि “10,000 रुपए पहली किस्त है और अगले छह महीनों में स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपए सहायता दी जाएगी।”

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