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बिजली बिल और टैरिफ बढ़ोतरी पर AAP का सरकार पर हमला, उत्तम जायसवाल बोले- अब बिजली व्यवस्था के निजीकरण की तैयारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के बढ़ते बिल और हाल ही में हुई टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करने के लिए मजबूर कर रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

उत्तम जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ स्मार्ट मीटर को लेकर भी लगातार उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल पहले की तुलना में काफी अधिक आए हैं। ऐसे में सरकार को पहले बिल बढ़ने के कारणों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से बिजली दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे पहले भी आम उपभोक्ताओं को बिजली से जुड़े खर्चों का सामना करना पड़ रहा था। जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले बिजली दरें बढ़ाईं, स्मार्ट मीटर लगाए और 400 यूनिट तक मिलने वाली छूट को समाप्त किया, अब बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों के प्रवेश की संभावना बढ़ रही है।

निजीकरण को लेकर सरकार से सवाल

AAP नेता ने बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा को केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) में टाटा पावर की ओर से रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों के लिए वितरण लाइसेंस संबंधी आवेदन का हवाला देते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि निजी कंपनियों को बिजली वितरण की जिम्मेदारी दी जाती है तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इसका आम उपभोक्ताओं की जेब पर क्या असर पड़ेगा। साथ ही ग्रामीण और कम आय वाले उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

स्मार्ट मीटर पर स्वतंत्र जांच की मांग

उत्तम जायसवाल ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य बेहतर बिलिंग, पारदर्शिता और बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार बताया गया था। लेकिन यदि मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिलों में अचानक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है, तो इसकी तकनीकी और स्वतंत्र जांच जरूरी है।

उन्होंने केंद्र की RDSS योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटरिंग को बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि तकनीक लागू करने के साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान की मजबूत व्यवस्था भी सुनिश्चित करे।

AAP ने रखीं ये मांगें

आम आदमी पार्टी ने सरकार से बिजली उपभोक्ताओं के हित में तत्काल कदम उठाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बढ़े हुए बिजली टैरिफ की समीक्षा की जाए, स्मार्ट मीटर से संबंधित अधिक बिलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और निजी कंपनियों को बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

AAP नेता ने कहा कि बिजली हर परिवार की बुनियादी जरूरत है। इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिजली व्यवस्था में होने वाले किसी भी बदलाव का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े।

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