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पीेएम के आवास पर कांग्रेस का प्रदर्शन गलत मिसाल, सरकारी सूत्रों ने कहा-परिपक्व लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता

नई दिल्ली। इस तरह के विरोध प्रदर्शन ‘परिपक्व लोकतंत्रों में नहीं देखे जाते’ और चेतावनी दी कि राजनीतिक नेताओं के आवासों को निशाना बनाकर किए जाने वाले प्रदर्शनों के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कांग्रेस ने पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करके एक बहुत ही गलत और खतरनाक मिसाल कायम की है। यह न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इस तरह का दुर्भावनापूर्ण व्यवहार परिपक्व लोकतंत्रों में नहीं देखा जाता है।

सरकारी सूत्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने इस प्रदर्शन को सुरक्षा के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय बताया और विपक्षी पार्टी पर गलत और खतरनाक मिसाल कायम करने का आरोप लगाया। सूत्रों ने कहा कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन “परिपक्व लोकतंत्रों में नहीं देखे जाते” और चेतावनी दी कि राजनीतिक नेताओं के आवासों को निशाना बनाकर किए जाने वाले प्रदर्शनों के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कांग्रेस ने पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करके एक बहुत ही गलत और खतरनाक मिसाल कायम की है। यह न केवल सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इस तरह का दुर्भावनापूर्ण व्यवहार परिपक्व लोकतंत्रों में नहीं देखा जाता है।

सूत्रों ने पड़ोसी देशों की उन घटनाओं का भी ज़िक्र किया जहाँ राजनीतिक नेताओं के घरों के बाहर विरोध-प्रदर्शन बढ़ गए थे, और राजनीतिक दलों से संयम बरतने की अपील की। सूत्रों ने आगे कहा, हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पड़ोस में क्या हुआ था, जब ऐसे विरोध-प्रदर्शनों में नेताओं के घरों को निशाना बनाया गया था।

कांग्रेस ने रखी 5 मांगें

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, केंद्रीय गृहमंत्री से दोनों सदनों में इस मामले पर बयान देने और सदन में पूरे प्रकरण पर विस्तृत चर्चा कराई जाने की मांग की गई है। छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना और संबोधित किया जाए। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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