LPG-LNG संकट की आंच में कूटनीति का दांव! UAE जाएंगे जयशंकर, कतर पहुंचे पुरी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्ष विराम के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं. इन दौरों का लक्ष्य भारत की LNG और LPG आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना है.
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल 2026 को कतर के 2 दिवसीय दौरे पर हैं. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हालिया संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी. कतर, भारत के लिए सबसे बड़े LNG आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और देश की कुल LNG जरूरतों का 40% से अधिक हिस्सा यहीं से आता है. संघर्ष के दौरान ईरान द्वारा कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के ठिकानों को निशाना बनाए जाने से उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा था. पुरी के दौरे का प्रमुख उद्देश्य हाल ही में हुए दीर्घकालिक LNG समझौतों जो 2048 तक प्रभावी हैं की स्थिरता सुनिश्चित करना है. साथ ही, भारत यह भी चाहता है कि LPG और LNG की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए.
वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर 11-12 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा करेंगे. UAE भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है और दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं.
जयशंकर इस दौरान UAE नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा करेंगे. खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है.
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी गई है. हाल ही में भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर 9 अप्रैल को मुंबई पहुंचा.
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर खतरा मंडरा रहा था. अब संघर्ष विराम के बाद इसके फिर से पूरी तरह खुलने की उम्मीद है. भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि देश की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है. ऐसे में कतर के साथ बेहतर समन्वय भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हो गया है.




